Sunday, April 14, 2024

climate change shocking study : दुनिया लगातार हो रही गर्म, ध्रुवों पर पिघल रही बर्फ बढ़ा रही है हमारे दिन का समय… डंकन एगन्यू की हैरान करने वाली स्टडी

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Khabarwala 24 News New Delhi : climate change shocking study दुनिया लगातार गर्म हो रही है। ध्रुवों पर जमा बर्फ तेजी से पिघल रही है। इससे सिर्फ समंदर का जलस्तर नहीं बढ़ रहा. बल्कि हमारे दिनभर का समय भी बदल रहा है। इससे पूरे साल का समय बदल रहा है। इन सबके पीछे वजह है पेट्रोल, डीजल, कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधन का भरपूर इस्तेमाल। दिन भर का समय कुछ सेकेंड्स में बदले तो इंसानों को पता नहीं चलता. लेकिन इनकी गणना का दुनिया भर की बेहद सटीक 450 एटॉमिक घड़ियों को पड़ता है। ये घड़ियां पूरी दुनिया में समय को संतुलित करने के लिए बनाई गई हैं, जिसे कॉर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) कहा गया है, जिसे पहली बार 1969 में परिभाषित किया गया था।

धरती पर समय की गणना का पारंपरिक तरीका है रोटेशन (climate change shocking study)

धरती पर समय की गणना का पारंपरिक तरीका है पृथ्वी के रोटेशन यानी घुमाव पर नजर रखना. लेकिन धरती के घुमाव में भी अंतर आता है. इसलिए 1972 से सही समय जानने के लिए आधिकारिक टाइम स्टैंडर्ड में 27 लीप सेकेंड्स जोड़ने का प्रबंध किया. लेकिन पिघलती बर्फ से दिन का समय बढ़ रहा है। ये हैरान करने वाला है।

जानिए कैसे पिघलती हुई बर्फ बदल देती है दिन का समय? (climate change shocking study)

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के जियोलॉजिस्ट डंकन एगन्यू ने कहा कि ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में लगातार बर्फ पिघल रही है। इसकी वजह है ग्लोबल वॉर्मिंग यानी बढ़ता हुआ तापमान। इससे धरती की गति पर असर पड़ रहा है. जिससे दिन का समय बढ़ रहा है। यह मात्रा बेहद छोटी है लेकिन एटॉमिक क्लॉक इसे पकड़ लेता है।

धरती की एंग्युलर वेलोसिटी को कम कर रही पिघलती बर्फ (climate change shocking study)

एगन्यू ने यह रिपोर्ट नेचर जर्नल में प्रकाशित कराई है, जिसमें बताया पिघलती हुई बर्फ धरती की एंग्युलर वेलोसिटी को कम कर रहा है। इसलिए अब निगेटिव लीप सेकेंड की जरूरत है या फिर एक सेकेंड छोड़कर दूसरे सेकेंड को जोड़ने की। वैज्ञानिकों को अब यह तीन साल बाद करना होगा, जबकि यह पहले होना चाहिए था।

समय बदलने से सबसे बड़ी दिक्कत इंसानों को क्या होगी? (climate change shocking study)

एटॉमिक क्लॉक में लीप सेकेंड को बढ़ाने या घटाने पर सबसे बड़ी दिक्कत ये आती है कि नेटवर्क कंप्यूटिंग और फाइनेंशियल मार्केट को अपग्रेड करना होता है ताकि वह UTC के हिसाब से काम कर सकें। उन्हें सटीक और स्टैंडर्ड बनाना होगा, क्योंकि निगेटिव लीप सेकेंड इससे पहले कभी ट्राई नहीं किया गया।

होने वाली देरी का स्वागत करना चाहिए. इससे पृथ्वी बचेगी (climate change shocking study)

मौसम विज्ञानी पैट्रिजिया टावेला ने कहा कि निगेटिव लीप सेकेंड कभी नहीं जोड़ा गया। न ही इसका कोई टेस्ट हुआ है, इसलिए यह सही से नहीं पता है कि इससे किस तरह की दिक्कतें आएंगी। उसे किस तरह से ठीक किया जाएगा, लेकिन एगन्यू कहते हैं कि इससे होने वाली देरी का भी स्वागत करना चाहिए। इससे पृथ्वी बचेगी।

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