Wednesday, February 21, 2024

Baba Rozbih Tomb पहला विवाद थमा भी नहीं अब 900 साल पुरानी बाबा रोजबीह की मजार पर चला बुलडोजर, भारत में रखी इस्लाम की नींव

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Khabarwala 24 News New Delhi : Baba Rozbih Tomb संजय वन के अंदर मौजूद करीब 600 साल पुरानी अखूंदजी मस्जिद को ढहाने का विवाद थमा भी नहीं था कि अब पता चला है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने यहां बाबा हाजी रोज़बीह की मजार को भी जमींदोज कर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के महरौली इलाके में डीडीए का बुलडोजर अभियान सवालों में घिरा हुआ है। यहां हाजी रोज़बीह को दिल्ली के पहले सूफी संतों में से एक माना जाता है, जिनकी मजार को 30 जनवरी को वहां से हटा दिया गया। अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संजय वन के अंदर कई धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया, जिसमें 12वीं शताब्दी की यह कब्र भी शामिल है।

इतिहासकारों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल (Baba Rozbih Tomb)

दरअसल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया था कि कई अदालती आदेशों और टिप्पणियों के बावजूद, अधिकारियों ने उन्हें हटाने के लिए कुछ नहीं किया है। ऐसे में 900 साल पुरानी इस मजार को जमींदोज करने की इस कार्रवाई पर कई इतिहासकारों ने सवाल उठाते हुए हैरानी जताई कि क्या एजेंसियां ​​वन क्षेत्र में नए उल्लंघनों के बजाय पुराने स्मारकों को निशाना बना रही थीं।

दिल्ली के सबसे पुराने संतों में से एक बाबा (Baba Rozbih Tomb)

Baba Rozbih Tomb यह कब्र किला लाल कोट के प्रवेश द्वार पर थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहायक अधीक्षक मौलवी जफर हसन द्वारा 1922 में प्रकाशित ‘मोहम्मडन और हिंदू स्मारकों की लिस्ट, वॉल्युम III- महरौली जिला’ में इसका जिक्र मिलता है। इसमें बताया गया है कि ‘बाबा हाजी रोज़बीह को दिल्ली के सबसे पुराने संतों में से एक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि वह राय पिथौरा के समय दिल्ली आए थे और किले की खाई के पास एक गुफा में अपना निवास स्थान बनाया था।

दिल्ली में इस्लाम फैलाने में बड़ा हाथ (Baba Rozbih Tomb)

Baba Rozbih Tomb इस किताब में जिक्र किया गया है कि ‘बाबा रोज़बीह की सलाह पर कई हिंदुओं ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। ज्योतिषियों ने इसे एक अपशकुन माना था और राजा को बताया था कि बाबा हाजी का आगमन दिल्ली में मुस्लिम शासन के आगमन का पूर्वाभास देता है। स्थानीय लोककथा में कहा गया है कि राय पिथौरा की एक बेटी ने भी उनके जरिये ही इस्लाम अपनाया था और उन्होंने ही वहां उनकी मजार बनवाई थी।

सदियों से है कब्र फिर अतिक्रमण कैसे? (Baba Rozbih Tomb)

Baba Rozbih Tomb एएसआई (दिल्ली सर्कल) के अधीक्षण पुरातत्वविद प्रवीण सिंह ने बताया कि यह कब्र एएसआई के तहत संरक्षित स्मारकों की लिस्ट में नहीं था। सिंह ने कहा, ‘यह लिस्ट में नहीं है। इसके विध्वंस से पहले डीडीए या किसी अन्य निकाय ने हमसे संपर्क नहीं किया था। हालांकि प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक राणा सफ़वी डीडीए की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि संजय वन के अंदर धार्मिक संरचनाओं को ‘अतिक्रमण’ कहना गलत था। कहा, ‘बाबा हाजी रोज़बीह की कब्र यहां सदियों से है। अतीत की कोई चीज़ वर्तमान में अतिक्रमण कैसे हो सकती है। यह छात्रों, इतिहासकारों और दिल्ली के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

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