Lane Driving जरा-सी लापरवाही दे सकती है हादसे को निमंत्रण, इसे जानना जरूरी, क्या हैं इसके नियम

Khabarwala 24 News New Delhi : Lane Driving भारत में ट्रक हड़ताल की वजह से सड़क दुर्घटनाएं भी चर्चा में आ गई हैं। दरअसल आप कह सकते हैं कि लेन ड्राइविंग सड़कों पर सुरक्षित और अनुशासित तरीके से जुड़ी हुई चीज है। हालांकि अगर आप सड़कों पर चलते समय लेन को ब्रेक करते हैं तो […]

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Khabarwala 24 News New Delhi : Lane Driving भारत में ट्रक हड़ताल की वजह से सड़क दुर्घटनाएं भी चर्चा में आ गई हैं। दरअसल आप कह सकते हैं कि लेन ड्राइविंग सड़कों पर सुरक्षित और अनुशासित तरीके से जुड़ी हुई चीज है। हालांकि अगर आप सड़कों पर चलते समय लेन को ब्रेक करते हैं तो अक्सर हादसों को मौका भी देते हैं। तब ट्रैफिक पुलिस आप पर लापरवाही से ड्राइविंग का मामला जरूर बना सकती है। भारत न्याय संहिता के तहत खराब ड्राइविंग से हादसों को लेकर तो कानून बन गया है लेकिन राजमार्गों जब आप अपनी कार या वाहन को ड्राइव कर रहे होते हैं तो आपको ये मालूम रहना चाहिए कि लेन ड्राइविंग जरूरी है और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है। लेन ड्राइविंग के अपने नियम जरूर होते हैं हालांकि इसे कानून का जामा नहीं पहनाया गया है। मोटे तौर पर लेन का अर्थ सड़क के हिस्से हैं। आमतौर पर एक भारतीय राजमार्ग दो लेन से लेकर 04 से 06 लेन के होते हैं। हालांकि देश के कुछ एक्सप्रेस हाईवे 08 लेन के भी हैं। अमेरिका के ह्यूस्टन में एक हाईवे 26 लेन का है और इसे दुनिया में सबसे ज्यादा लेन वाली सड़क कहा जाता है। दुनिया में बड़े हाईवे 15 लेन वाले हैं।

सवाल–क्या होती है लेन की चौड़ाई और नंबर्स? (Lane Driving)

इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के अनुसार सिंगल लेन सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 3.75 मीटर है, जबकि दो-लेन सड़क की चौड़ाई 7 मीटर है और ऊंचे किनारों के साथ यह 7.5 मीटर है। 06 लेन वाले एक्सप्रेसवे की चौड़ाई 22.5 मीटर होनी चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्ग के गलियारे की न्यूनतम चौड़ाई 5.7 मीटर है। एक लेन वाली सड़क दो-तरफा यात्रा की अनुमति देती है, लेकिन इतनी चौड़ी नहीं होती कि वाहन एक-दूसरे की तरफ से गुजर सकें। दोहरी लेन सड़कों में प्रत्येक दिशा में दो लेन का यातायात होता है। बहु-लेन सड़कों में तीन या अधिक लेन हो सकती हैं।

सवाल–भारत में इन नियमों का पालन किया जाए? (Lane Driving)

भारत में बायां लेन यानि सबसे किनारा वाला लेन धीमी गति से चलने वाले वाहनों और भारी वाहनों के लिए है. मध्य लेन मध्यम गति वाले वाहनों के लिए है और बाएं लेन में धीमी गति वाले वाहनों को ओवरटेक करने के लिए है। दाहिनी लेन तेज़ वाहनों और ओवरटेकिंग के लिए है। हमेशा मुड़ते समय वाहन सबसे बाईं लेन में होना चाहिए।

सवाल–ओवरटेक करने का नियम क्या कहता है? (Lane Driving)

व्यस्त ट्रैफिक में लेन बदलकर दूसरी कार को ओवरटेक करने से बचें। लेन बदलते समय दाईं ओर से ही सिग्नल दें। ओवरटेक करें।

सवाल–4-वे हाईवे लेन पर वाहन चलाने का नियम? (Lane Driving)

अगर आप 04-वे (दोनों ओर 02 लेन) लेन पर हैं तो बाईं ओर रहना चाहिए। सामने वाले वाहनों से आगे निकलने के लिए दाईं लेन का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आप 06 लेन वाले राजमार्ग पर यात्रा कर रहे हैं तो ड्राइविंग शैली बदल जाएगी (दोनों तरफ तीन लेन). बायां हिस्सा आमतौर पर ट्रकों और दोपहिया वाहनों जैसे धीमे वाहनों के लिए आरक्षित है। यदि आप कार चलाते हैं, तो मध्य लेन पर रहना सबसे अच्छा है। ओवरटेक के लिए दाहिनी लेन का इस्तेमाल करें। अपनी पोजिशन बदलने के लिए इंडीकेटर का इस्तेमाल जरूर करें। तेज गति की कारों जरूर आगे जाने दें।

सवाल–किस तरह गलत लेन बदलने से हादसे होते हैं? (Lane Driving)

06 लेन वाली सड़कों पर अधिकांश घटनाएं अनुचित लेन परिवर्तन या गलत लेन (यानी, सबसे दाहिनी लेन) में चलने वाली सुस्त कारों के चलते होती हैं। साथ ही लेन पर अचानक बाएं से दाएं और दाएं से बाएं टेढ़ा-मेढ़ा नहीं चलना चाहिए। भारत जैसे देश में हॉर्न बजाकर कार को ओवरटेक करना आम बात हो गई है।

सवाल – अगर हाई-वे पर कार खराब हो तो क्या करें? (Lane Driving)

अगर राजमार्ग पर चलते समय कार खराब हो जाए तो खतरे की चेतावनी देने वाली लाइट जला लें। वाहन को सुरक्षित रूप से सर्विस लेन (राजमार्ग का सबसे बायां भाग) में ले आएं।

सवाल – विदेशों में सबसे दाहिनी लेन किसके लिए है? (Lane Driving)

विदेशों में सबसे दाहिनी लेन एम्बुलेंस या फायर ट्रक जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए समर्पित है।

सवाल – कैसे हुई लेन ड्राइविंग नियमों की शुरुआत? (Lane Driving)

1906 में सड़कों को सुरक्षित बनाने के प्रयास में वेन काउंटी, मिशिगन में पहले सड़क आयोग का गठन किया गया. हेनरी फोर्ड इस बोर्ड में थे। तब तक कंक्रीट की सड़कें नहीं होती थीं। 1909 में आयोग ने पहली कंक्रीट सड़क के निर्माण का आदेश दिया। 1911 में राजमार्गों के लिए लेन सड़कों की कल्पना की गई इसीलिए सड़क आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एडवर्ड एन. हाइन्स को लेन सड़कों और इसके चिह्नों का आविष्कारक कहा जाता है। 1917 के आसपास सड़कों पर सफेद पेंट लेन को बांटने और चिन्हिंत करने का काम शुरू हुआ। 20वीं सदी के पहले दो दशकों में ऑटोमोबाइल, ट्रक और बसें जब खूब उपयोग में लाई जाने लगीं तो उनमें आमने-सामने की टक्कर आम हो गई।

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Sandeep Kumar
Sandeep Kumarhttps://www.khabarwala24.com/
मेरा नाम Sandeep Kumar है। मैं एक अनुभवी कंटेंट राइटर हूं और पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। अभी मैं Khabarwala24 News में कई अलग-अलग कैटेगरी जैसे कि टेक्नोलॉजी, हेल्थ, ट्रैवल, एजुकेशन और ऑटोमोबाइल्स पर कंटेंट लिख रहा हूं। मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने शब्दों के ज़रिए लोगों को सही, सटीक और दिलचस्प जानकारी दे सकूं।

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