Khabarwala24 Meerut News: मेरठ-हापुड़ संसदीय क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के सांसद अरुण गोविल ने देश के केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को एक पत्र प्रेषित कर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों तथा सूक्ष्म कारोबारियों के हितों की रक्षा का मुद्दा उठाया है। सांसद ने माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया आदेश की पृष्ठभूमि में आम नागरिकों के आवासीय व आजीविका के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक, कानूनी एवं नीतिगत समाधान निकालने का पुरजोर आग्रह किया है।
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण कार्रवाई का उठाया मुद्दा (Meerut News)
सांसद अरुण गोविल ने अपने पत्र में केंद्र सरकार द्वारा न्याय व्यवस्था को आमजन के अनुकूल और सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। इसके उपरांत उन्होंने मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट तथा आसपास की कॉलोनियों की मौजूदा जटिल स्थिति की तरफ केंद्रीय विधि मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।
उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि 14 जुलाई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘लोकेश कुमार खुराना बनाम राजेंद्र कुमार बड़जात्या’ मामले में दिए गए फैसले के अनुपालन में मेरठ के शास्त्रीनगर क्षेत्र में अवैध निर्माण और सेटबैक नियमों के उल्लंघन को आधार बनाकर तोड़फोड़ (ध्वस्तीकरण) की प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
40-45 साल पुरानी कॉलोनी, लोड-बेयरिंग स्ट्रक्चर पर खतरा (Meerut News)
सांसद ने ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत करते हुए बताया कि शास्त्रीनगर आवासीय योजना का निर्माण वर्ष 1980 के दशक में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा किया गया था। इस योजना का मूल उद्देश्य निर्धन और मध्यम आय वर्ग के लोगों को आश्रय देना था। उस समय तैयार किए गए लेआउट और नियमों में सेटबैक छोड़ने का कोई स्पष्ट प्रावधान शामिल नहीं था। आगे चलकर आवास विकास परिषद ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए सेटबैक से जुड़े नियम लागू किए।
गोविल ने रेखांकित किया कि पिछले 40 से 45 वर्षों से अनेक परिवार इन मकानों में शांतिपूर्वक निवास कर रहे हैं। इनमें से बहुसंख्यक भवन ‘लोड-बेयरिंग’ तकनीक पर निर्मित हैं। ऐसे ढांचों में यदि आंशिक तोड़फोड़ भी की जाती है, तो संपूर्ण मकान के ढहने या असुरक्षित होने का बड़ा जोखिम है। इसके अलावा, इन मकानों के निचले हिस्से में संचालित छोटी-मोटी दुकानें हजारों स्थानीय परिवारों के जीविकोपार्जन का एकमात्र आधार हैं।
राष्ट्रीय नीति और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता (Meerut News)
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकरण को ‘आंखें खोलने वाला’ (Eye-Opener) बताए जाने का हवाला देते हुए सांसद ने चिंता जताई कि यदि बिना किसी स्पष्ट और एकीकृत राष्ट्रीय नीति के पूरे देश में एक समान कार्रवाई शुरू की गई, तो देश भर के करोड़ों निर्धन और निम्न आय वर्ग के परिवार बेघर हो जाएंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संवेदनशील विषय को केवल कठोर वैधानिक चश्मे से देखने के बजाय मानवीय, सामाजिक और आजीविका के आधार पर समझा जाना चाहिए। दशकों से रह रहे लोगों के आशियाने और छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी अचानक छीन जाने से गंभीर सामाजिक व आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
सांसद अरुण गोविल ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि न्याय और कानून का सम्मान बनाए रखते हुए ऐसा संतुलित विधिक ढांचा तैयार किया जाए, जिससे किसी भी गरीब परिवार का घर और रोजगार प्रभावित न हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस विषय पर न्यायोचित और जनहितैषी रुख अपनाएगी।
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