रबर डैम: गुजरात में दक्षिण कोरिया की तकनीक से बन रहे हैं पहले 2 रबर बांध, जानिए खासियत

गुजरात में पहले दो एयर-फिल्ड रबर डैम (Rubber Dam) बनाए जा रहे हैं। दक्षिण कोरिया की रबर ब्लैडर टेक्नोलॉजी से बनने वाले इन बांधों से सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी।

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छोटा उदयपुर/तापी, 6 जुलाई (khabarwala24)। गुजरात, दक्षिण कोरिया की रबर ब्लैडर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपने पहले दो एयर-फिल्ड रबर डैम बनाने जा रहा है। इन प्रोजेक्ट्स से छोटा उदयपुर और तापी जिलों में सिंचाई, ग्राउंडवाटर रिचार्ज और बाढ़ प्रबंधन में सुधार होने की उम्मीद है।

अभी बन रहे दो बांधों में छोटा उदयपुर जिले के बोदेली तालुका में हेरन नदी पर बना राजवासना रबर बांध और तापी जिले के डोलवन तालुका में अंबिका नदी पर बना पाठकवाड़ी रबर बांध शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स में कुल मिलाकर 162 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया गया है।

राज्य सरकार ने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स दूर-दराज के इलाकों में सिंचाई और पानी की सप्लाई के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा हैं और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैच द रेन कैंपेन को भी सपोर्ट करते हैं।

राजवासना रबर डैम का निर्माण 82.97 करोड़ रुपए से ज्यादा की अनुमानित लागत से किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को 30 महीने की निर्माण अवधि में सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

इस डैम में हेरन नदी पर 180 मीटर लंबा और 3.5 मीटर ऊंचा हवा भरने वाला रबर ब्लैडर लगाया जाएगा।

सरकार के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी से मौजूदा वियर की पानी जमा करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी, जिससे इसमें 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी जमा किया जा सकेगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से 25 गांवों के किसानों को सीधा फायदा होगा, क्योंकि इससे 3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी।

पानी का स्टोरेज बढ़ने से ग्राउंडवाटर लेवल में भी सुधार होने की उम्मीद है, जिससे आस-पास के इलाकों में सिंचाई और पीने का पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। कंस्ट्रक्शन का लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

रबर डैम टेक्नोलॉजी के फायदे

अधिकारियों ने कहा, रबर डैम सिस्टम से मौजूदा वियर में लंबे समय से जमा गाद की समस्या भी हल हो जाएगी, क्योंकि इससे जमा हुई रेत और गाद को पूरी तरह से हटाया जा सकेगा। भारी बारिश के दौरान, इस हवा भरने योग्य ढांचे की हवा निकालकर उसे नीचे किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ का पानी आसानी से निकल सके और आस-पास के गांवों में बाढ़ का खतरा कम हो सके।

इस प्रोजेक्ट के तहत, नदी के बाएं किनारे पर 900 मीटर लंबी और दाएं किनारे पर 500 मीटर लंबी बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट में 10 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम भी शामिल है।

राज्य सरकार ने कहा कि राजवासना प्रोजेक्ट मौजूदा नहर नेटवर्क के जरिए खरीफ और रबी, दोनों तरह की फसलों के लिए सिंचाई का पर्याप्त पानी सुनिश्चित करेगा।

सरकार की योजना राजवासना वियर स्कीम के तहत नहरों को फ़ायदा पाने वाले 25 गांवों के तालाबों से जोड़ने की भी है, ताकि सिंचाई और पीने के लिए अतिरिक्त पानी जमा किया जा सके।

दूसरा प्रोजेक्ट, तापी जिले में पाठकवाड़ी रबर डैम, अंबिका नदी पर लगभग 79.13 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है।

जापानी डिजाइन पर आधारित इस प्रोजेक्ट में दक्षिण कोरिया से मंगाई गई एक खास रबर ब्लैडर का इस्तेमाल किया गया है और इसका मकसद लगभग 650 हेक्टेयर खेती की ज़मीन को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है।

सरकार के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से पाठकवाड़ी, ढोडियावाड, उनाई और सिंधाई गांवों के किसानों को खरीफ और गर्मी की फसलों के लिए पानी मिल सकेगा। इसका लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

अधिकारियों ने बताया, हवा से भरे रबर डैम को इसलिए चुना गया क्योंकि सर्वे में पाया गया कि इलाके की समतल जमीन और नदी के निचले किनारों के कारण पारंपरिक ऊंचे चेक डैम या वियर स्ट्रक्चर उपयुक्त नहीं थे। यह फैसला स्थानीय किसान नेताओं और व्यारा के विधायक मोहन कोकानी के सुझावों के बाद लिया गया।

पाठकवाड़ी डैम को जापानी कोड 2000 मानकों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। इसके रबर ब्लैडर की मोटाई 18 मिमी से 32 मिमी के बीच है और इसे 50 डिग्री से ज़्यादा तापमान सहने के लिए डिजाइन किया गया है।इसकी अनुमानित उम्र लगभग 30 साल है।

अधिकारियों ने आगे कहा, इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में ज्वारीय रेगुलेटर के तौर पर भी किया जा सकता है ताकि मीठे पानी के स्रोतों में समुद्री पानी को घुसने से रोका जा सके।

Source : IANS

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