नई दिल्ली, 16 मार्च (khabarwala24)। देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट एक हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा कि इस मामले में हमने एक स्टेटस रिपोर्ट फाइल की है, जिसे कोर्ट पढ़ ले, इसके बाद मामले पर आगे की सुनवाई करें।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने देश भर में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में जांच का ज़िम्मा सीबीआई को सौंपा था। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी कोर्ट को बताया था कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) इस समिति के अध्यक्ष हैं।
इसके पहले 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि ऐसे घोटालों में बैंक अधिकारी भी आरोपियों के साथ मिले हुए पाए गए हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिक इसकी चपेट में आ रहे हैं। एक रिटायर्ड दंपति का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने बताया कि उनकी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी ठगों ने छीन ली।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने केंद्र सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश कर बताया था कि डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए अब काफी व्यापक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की गई है। कोर्ट ने इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी निर्देश जारी करने की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई की एसओपी का जिक्र किया था, जिसमें साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर बैंकों द्वारा अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने जैसी त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय से कहा था कि 2 जनवरी 2026 की एसओपी को पूरे देश में लागू किया जाए और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इन नियमों को दो हफ्तों के अंदर नोटिफाई करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने चार हफ्तों के भीतर एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का ड्राफ्ट तैयार करने को कहा था। इसके साथ ही सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पहचान करने और जांच के निर्देश दिए गए थे। आरबीआई को बैंकों को उचित कदम उठाने का आदेश देने को कहा था। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को समय पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
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