तेहरान, 9 फरवरी (khabarwala24)। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) के सचिव अली लारीजानी मंगलवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ओमान की राजधानी मस्कट का दौरा करेंगे। यह जानकारी एसएनएससी से जुड़े समाचार पोर्टल नूर न्यूज ने दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अली लारीजानी ओमान के शीर्ष अधिकारियों से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब ओमान ने ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता की मेजबानी और मध्यस्थता की थी। शुक्रवार को हुई इस वार्ता के बाद ओमान को भविष्य की संभावित बातचीत के लिए एक अहम मंच माना जा रहा है।
तेहरान में रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि परमाणु वार्ता के अगले दौर की तारीख और स्थान ओमान के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया जाएगा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ हालिया अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता को “एक कदम आगे” करार दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसी दौरान अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध और टैरिफ की धमकियां देकर दबाव बढ़ाया है।
ओमान की मध्यस्थता में हुई यह वार्ता इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्चस्तरीय बातचीत मानी जा रही है। उस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमला किया था।
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत उसके “स्पष्ट अधिकारों” के दायरे में है। उन्होंने कहा, “ईरानी राष्ट्र सम्मान का जवाब सम्मान से देता है, लेकिन दबाव की भाषा बर्दाश्त नहीं करता।”
वहीं, मस्कट में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि अमेरिका में इस कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए “आवश्यक गंभीरता” की कमी दिख रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पर लगातार लगाए जा रहे प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में कुछ सैन्य गतिविधियां अमेरिका के इरादों पर सवाल खड़े करती हैं। अराघची ने दो टूक कहा कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु अधिकार, जिनमें यूरेनियम संवर्धन भी शामिल है, किसी भी स्थिति में समझौते से बाहर नहीं किए जा सकते।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम कभी भी वार्ता के एजेंडे में नहीं रहा है और भविष्य में भी नहीं रहेगा। बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित है।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ईरान से उसके परमाणु ढांचे को खत्म करने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग करते रहे हैं, जिसे विश्लेषकों के मुताबिक तेहरान स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
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