चेन्नई, 8 फरवरी (khabarwala24)। तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (टीएनपीएससी) द्वारा परीक्षा केंद्रों के आवंटन में खामियों का हवाला देते हुए रविवार को होने वाली ग्रुप-2 और ग्रुप-2ए की मुख्य परीक्षाओं को अंतिम समय पर स्थगित कर दिया गया। इससे पूरे तमिलनाडु में हजारों सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार स्तब्ध और निराश रह गए।
अचानक लिए गए इस फैसले ने न केवल अभ्यर्थियों की तैयारियों पर पानी फेर दिया, बल्कि यह मामला जल्द ही राजनीतिक विवाद का रूप भी ले बैठा, जिसमें कई राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
परीक्षा में शामिल होने के लिए दूर-दराज के इलाकों से यात्रा कर केंद्रों तक पहुंचे उम्मीदवारों ने अचानक हुई इस घोषणा पर गहरा रोष और निराशा जताई। कई अभ्यर्थियों ने इस अत्यंत प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत की थी।
अचानक परीक्षा स्थगित होने से उम्मीदवारों का मनोबल टूटता नजर आया। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई, निजी जीवन और कई बार नौकरी के अवसरों तक को छोड़कर इस परीक्षा की तैयारी की थी। ऐसे में आखिरी वक्त पर परीक्षा रद्द होना उनके समय, संसाधनों और मानसिक ऊर्जा की बर्बादी के समान है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के अध्यक्ष विजय ने डीएमके सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए कहा कि सरकार की खराब योजना और प्रशासनिक अक्षमता ने “हजारों युवाओं की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ किया है।”
विजय ने कहा कि सरकारी नौकरी पाना राज्य के लाखों युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है, जिसके लिए वे वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं और प्रारंभिक परीक्षा जैसी कठिन बाधाओं को पार करते हैं।
विजय ने आगे कहा कि मुख्य परीक्षा को अंतिम समय में रद्द कर देना अभ्यर्थियों के आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुंचाता है और उनका कीमती समय बर्बाद करता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भले ही परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी जाए, उम्मीदवारों को दोबारा उसी स्तर की तैयारी करनी पड़ेगी, जिससे मानसिक तनाव, अनिश्चितता और दबाव अधिक बढ़ेगा।
टीवीके अध्यक्ष के अनुसार, इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही युवा कल्याण के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाती है। उन्होंने नगर निगम की नौकरियों समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पहले सामने आ चुकी अनियमितताओं का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि कहीं इस बार भी परीक्षा रद्द किए जाने के पीछे कोई गंभीर और छिपा हुआ कारण तो नहीं है।
विजय ने जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि यह संदेह होना स्वाभाविक है कि कहीं न कहीं कुछ छिपाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि जिम्मेदार अधिकारियों को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि वास्तव में परीक्षा स्थगित करने की नौबत क्यों आई। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के युवा इस तरह की लापरवाही को भूलने वाले नहीं हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी प्रतिक्रिया जरूर देंगे।
इस बीच, टीएनपीएससी की ओर से परीक्षाओं की संशोधित तिथियों की घोषणा किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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