‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ समाप्त, उद्देश्यों की प्राप्ति का दावा: बलोच लिबरेशन आर्मी

नई दिल्ली, 8 फरवरी (khabarwala24)। रक्तपात, कथित दमन और जबरन गायब किए जाने की घटनाओं से जूझ रहे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध तेज होने के बीच बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक सप्ताह तक चले अपने अभियान ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ के समाप्त होने का दावा किया है। संगठन ने कहा है कि […]

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नई दिल्ली, 8 फरवरी (khabarwala24)। रक्तपात, कथित दमन और जबरन गायब किए जाने की घटनाओं से जूझ रहे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध तेज होने के बीच बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक सप्ताह तक चले अपने अभियान ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ के समाप्त होने का दावा किया है। संगठन ने कहा है कि इस अभियान में उसके उद्देश्यों की पूर्ति हो गई है।

बीएलए की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बलूच लड़ाकों ने कई शहरों और कस्बों में एक साथ हमले किए, जिन्हें ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ नाम दिया गया। संगठन का दावा है कि इन हमलों में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ।

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द बलूचिस्तान पोस्ट (टीबीपी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह समन्वित शहरी अभियान बलूचिस्तान के 14 से अधिक शहरों में फैला हुआ था और इसे बीएलए के इतिहास का सबसे बड़ा, सबसे तीव्र और सबसे संगठित सैन्य अभियान बताया गया है।

बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलोच के बयान का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूच लड़ाकों ने कई स्थानों पर एक साथ हमले कर सुरक्षा चौकियों, सैन्य ठिकानों और कुछ शहरी इलाकों पर अस्थायी नियंत्रण स्थापित किया। संगठन का दावा है कि कुछ शहरों में बीएलए की इकाइयां लगातार छह दिनों तक डटी रहीं, जिससे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को पीछे हटना पड़ा।

टीबीपी की रिपोर्ट में बीएलए अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 362 से अधिक जवान मारे गए। बीएलए के अनुसार, इनमें पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और कथित तौर पर राज्य समर्थित सशस्त्र समूहों के सदस्य शामिल थे।

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बीएलए प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि संगठन के लड़ाकों ने 17 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि शेष बंदियों के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों और जनसंहार से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जाएगी।

प्रवक्ता ने ‘हेरोफ-2’ के उद्देश्यों को दोहराते हुए भविष्य में ऐसे सशस्त्र अभियानों की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा, “पहला उद्देश्य यह दिखाना था कि बलूच लड़ाकों में शहरी केंद्रों पर हमला करने और वहां नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता है। दूसरा, बलूच जनता को यह संदेश देना कि प्रतिरोध सामूहिक भरोसे और संगठनात्मक शक्ति पर आधारित है। तीसरा उद्देश्य बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों के कथित निर्विवाद प्रभुत्व को चुनौती देना था।”

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