लखनऊ, 8 फरवरी (khabarwala24)। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की गोशालाओं को गोवंश संरक्षण के साथ आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई पहल करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश की लगभग 7,500 गोशालाओं को कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
योजना के अंतर्गत गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हरे चारे का उत्पादन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि “मिशन फॉडर” नाम से शुरू किए जा रहे इस प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का उद्देश्य गोशालाओं को स्थायी चारा उपलब्ध कराना और किसानों को चारा उत्पादन से जोड़ना है।
इसके तहत प्रत्येक गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे चारा उत्पादन और आपूर्ति की एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार की जा सके। उन्होंने बताया कि मिशन फॉडर के अंतर्गत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि का उपयोग करते हुए मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का रोपण किया जाएगा। इसके अलावा गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा तथा लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा और बरसीम जैसे मौसमी चारे भी उगाए जाएंगे।
प्रदेश की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे की खेती संभव है। गो सेवा आयोग के अनुसार मोरिंगा पौधे 12 से 15 वर्षों तक और नेपियर घास 7 से 8 वर्षों तक लगातार हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। योजना के तहत गोशालाओं में संरक्षित गोवंश को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
अध्यक्ष ने बताया कि हरा चारा गोवंश के पोषण और स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक लाभकारी है। इससे दुग्ध उत्पादन में सुधार होने के साथ-साथ गोशालाओं की संचालन लागत में भी कमी आने की संभावना है। चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से बाहरी निर्भरता घटेगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार इस कार्ययोजना में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। मिशन फॉडर से हरित आवरण बढ़ने, भूमि की उर्वरता में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होने की भी उम्मीद है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा।
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