इस्लामाबाद, 8 फरवरी (khabarwala24)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में पुलिस को निशाना बनाकर किए गए दो अलग-अलग हमलों में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को खैबर पख्तूनख्वा के वज़ीर उप-मंडल स्थित खोनिया खेल पुलिस चेक पोस्ट पर हथियारबंद हमलावरों ने फायरिंग की। सूत्रों के अनुसार, जवाबी कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी नूर मोहम्मद घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
एक अन्य घटना में, मिराखेल पुलिस टीम को उस समय निशाना बनाया गया जब वे एक हत्या के शिकार व्यक्ति का शव बन्नू के डेरा इस्माइल रोड से अस्पताल ले जा रहे थे। सूत्रों ने बताया कि हथियारबंद हमलावरों की फायरिंग में अजमत नामक पुलिसकर्मी घायल हो गया। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में छह हमलावर शामिल थे, जो वारदात के बाद मौके से फरार हो गए।
इससे पहले 3 फरवरी को खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत जिले में एक पुलिस रिक्रूट कांस्टेबल की अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी। यह घटना सराय नौरंग इलाके के पास नस्रखेल स्थित दरगा जंगल में हुई थी।
जिला पुलिस प्रवक्ता कुदरतुल्लाह ने बताया कि मृतक कांस्टेबल हंगू ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण ले रहा था। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने कांस्टेबल को मंगलवार रात उसके घर से अगवा किया और दरगा नामक जंगल में ले जाकर उसकी हत्या कर दी।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में सरकार और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच संघर्षविराम समझौता समाप्त होने के बाद से पाकिस्तान में, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में, आतंकी गतिविधियों में तेज़ी से इजाफा हुआ है।
जनवरी में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह देश में बढ़ते संघर्ष और हिंसा का लगातार पांचवां साल बन गया।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज़ (पीआईपीएस) की पाकिस्तान सिक्योरिटी रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, वर्ष 2025 में देश में कुल 699 हमले दर्ज किए गए, जो 2024 की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक हैं। इन हमलों में 1,034 लोगों की मौत हुई, जबकि 1,366 अन्य घायल हुए, जो मृतकों की संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हमलों, आतंकवाद-रोधी अभियानों, सीमा संघर्षों और अपहरण जैसी घटनाओं सहित संघर्ष से जुड़ी हिंसा 1,124 मामलों तक पहुंच गई, जो 2024 के मुकाबले 43 प्रतिशत अधिक है। डॉन ने लिखा कि ये घटनाएं अब केवल अस्थायी झटके नहीं हैं, बल्कि एक गहराते और काबू से बाहर होते संकट की ओर इशारा करती हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हमलों में मारे जाने वालों में सुरक्षा बलों की संख्या काफी अधिक है और पुलिस थानों, गश्ती दलों व चेक पोस्टों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। अधिकतर हमले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हुए हैं।
खैबर पख्तूनख्वा के दक्षिणी जिलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर हमले आम होते जा रहे हैं। वहीं, बलूचिस्तान में उग्रवादियों ने हिट-एंड-रन हमलों से आगे बढ़कर हाईवे जाम करने, अपहरण और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने जैसी रणनीतियां अपनाई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा का बड़ा हिस्सा धार्मिक रूप से प्रेरित संगठनों, विशेष रूप से टीटीपी, के कारण है।
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