थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को मिला पुराना सहकर्मी, पूंछ के फार्वरड इलाके के दौरे के दौरान हुई मुलाकात

नई दिल्ली, 7 फरवरी (khabarwala24)। थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिन के दौरे पर शुक्रवार को जम्मू पहुंचे थे। पहले दिन थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू स्थित सेना के व्हाइट नाइट कोर में सुरक्षा हालात और भारतीय सेना की तैनाती की समीक्षा की। नगरोटा में सेना प्रमुख को कमांडरों ने काउंटर टेररिज्म ग्रिड […]

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नई दिल्ली, 7 फरवरी (khabarwala24)। थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिन के दौरे पर शुक्रवार को जम्मू पहुंचे थे। पहले दिन थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जम्मू स्थित सेना के व्हाइट नाइट कोर में सुरक्षा हालात और भारतीय सेना की तैनाती की समीक्षा की। नगरोटा में सेना प्रमुख को कमांडरों ने काउंटर टेररिज्म ग्रिड और डिप्लॉयमेंट की विस्तृत जानकारी दी।

सेना की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सेना प्रमुख ने जम्मू में तैनात अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से भी मुलाकात की। दूसरे दिन सेना की तैयारियों की समीक्षा के लिए खुद वो ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। थलसेना प्रमुख पुंछ के फॉरवर्ड इलाकों में पहुंचे और सेना के जवानों से मुलाकात की।

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सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सेना प्रमुख ने जवानों के अच्छे मनोबल और सतर्कता की सराहना की। अपने दौरे के दौरान ही वो पूंछ के कामसर गांव पहुंचे. जहां उनकी मुलाकात 18 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के सेवानिवृत्त सूबेदार (मानद कैप्टन) परवेज अहमद से हुई।

यह मुलाकात इसलिए ख़ास थी कि क्योंकि साल 2002 से 2005 के बीच जनरल उपेंद्र द्विवेदी बटालियन के कमांड कर रहे थे, तो सूबेदार परवेज़ अहमद उनकी यूनिट में तैनात थे। सूबेदार परवेज़ अहमद ने मार्च 1991 में सेना में भर्ती हुए थे और 25 साल की सर्विस के बाद उन्होंने मार्च 2019 में रिटायरमेंट ले लिया था।

ऑपरेशन सिंदूर में रिटायर सेना के जवानों ने भी अपनी भागीदारी निभाई थी। सेना के मुताबिक रिटायर होने के बाद भी सूबेदार परवेज़ अहमद ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने जवानों की मदद की, जरूरी सामान से लेकर लोकल जानकारी भी साझा करने में मदद की। उनके इस योगदान को लेकर सेना प्रमुख ने उन्हें ‘वेटरन अचीवर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया।

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गौरतलब है कि सेना के रिटायर्ड अधिकारी और जवान हमेशा सेना की आंख और कान होते हैं साथ ही स्थानीय स्तर पर अपनी भागीदारी को निर्वाह करते हैं। पिछले कुछ सालों में आतंकियों के खिलाफ सफल ऑपरेशनों के पीछे सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल के साथ-साथ तेजी से लोकल इंटेलिजेंस का मिलना है।

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