हवाई यात्रियों के अधिकारों, मछुआरों और पशु कल्याण पर प्राइवेट मेंबर बिल

नई दिल्ली, 6 फरवरी (khabarwala24)। विभिन्न दलों के सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा में जन साधारण से जुड़े मुद्दों पर प्राइवेट मेंबर बिल रखे। इस दौरान राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तीन अहम विषयों से संबंधित निजी विधेयक सदन में पेश किए। इन विधेयकों का मकसद आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को कानून के […]

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नई दिल्ली, 6 फरवरी (khabarwala24)। विभिन्न दलों के सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा में जन साधारण से जुड़े मुद्दों पर प्राइवेट मेंबर बिल रखे। इस दौरान राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तीन अहम विषयों से संबंधित निजी विधेयक सदन में पेश किए। इन विधेयकों का मकसद आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को कानून के जरिए हल करना है। इनमें हवाई यात्रियों के अधिकार, कर्मचारियों का कार्यस्थल पर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से ध्यान रखने और पशु कल्याण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

वहीं, राज्यसभा सांसद बीधा मस्थान राव यादव ने मछुआरों के कल्याण और मत्स्य उद्योग के विकास से जुड़ा बिल पेश किया। शिवसेना यूबीटी से सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सबसे पहले हवाई यात्रा करने वाले लोगों के हित में एक निजी विधेयक राज्यसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में हवाई सफर आम लोगों के लिए जरूरी हो गया है, लेकिन यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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इस विधेयक का उद्देश्य हवाई यात्रियों के अधिकारों को साफ तौर पर तय करना और उनकी रक्षा करना है। इसमें यह सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि एयरलाइंस मनमाने ढंग से किराया न बढ़ाएं, यात्रियों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिलें और कंपनियां अनुचित मुनाफा न कमाएं। विधेयक में यह भी प्रावधान करने की बात कही गई है कि अगर फ्लाइट बिना वजह देर से होती है या यात्रियों का सामान खो जाता है या खराब हो जाता है तो उन्हें उचित मुआवजा मिले। कुल मिलाकर इसका मकसद हवाई यात्रा को सस्ता, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाना है।

वहीं, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे कर्मचारियों के हित में भी निजी विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग पूर्णकालिक, अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनके काम के घंटे, छुट्टियां और मानसिक सेहत को लेकर कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। इस विधेयक में काम के घंटों की सीमा तय करने, नियमित छुट्टियां देने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेने और उचित वेतन व मुआवजे की व्यवस्था करने की बात कही गई है।

चतुर्वेदी का कहना था कि लगातार बढ़ता काम का दबाव कर्मचारियों की सेहत और पारिवारिक जीवन दोनों पर असर डाल रहा है, इसलिए एक ऐसा कानून जरूरी है जो कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल दे। प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए प्रियंका चतुर्वेदी ने पशुओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में पालतू और घरेलू पशुओं के प्रजनन पर कोई सख्त नियंत्रण नहीं है, जिससे कई बार पशुओं के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होता है। उनके इस विधेयक का उद्देश्य पशु प्रजनकों और पशु मालिकों को नियमों के दायरे में लाना है। इसमें गैर-देशी पशुओं की इन-ब्रीडिंग और क्रॉस-ब्रीडिंग पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, ताकि पशुओं की सेहत सुरक्षित रहे।

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वहीं, राज्यसभा सांसद बीधा मस्थान राव यादव ने संसद में एक निजी मेंबर बिल पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य मछुआरों के कल्याण और मत्स्य उद्योग के विकास के लिए एक ठोस और संगठित व्यवस्था तैयार करना है। इस विधेयक के तहत मछुआरों के कल्याण और सहयोग के लिए एक राष्ट्रीय आयोग बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह आयोग मछुआरों, मछली पालकों, मत्स्य उद्योग से जुड़े मज़दूरों और अन्य कामगारों के हितों की रक्षा करेगा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करेगा। विधेयक में यह भी कहा गया है कि मत्स्य उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाई जाएं, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ें और मछुआरों की आमदनी में सुधार हो।

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