गुजरात ने 5.14 लाख नए लाभार्थियों को जोड़कर आंगनवाड़ी सेवाओं का विस्तार किया

गांधीनगर, 6 फरवरी (khabarwala24)। गुजरात में माताओं और छोटे बच्चों के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए गए एक विशेष कवरेज अभियान के दौरान 5.14 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को विभिन्न आंगनवाड़ी योजनाओं के तहत शामिल किया गया है।इस अभियान को नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच […]

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गांधीनगर, 6 फरवरी (khabarwala24)। गुजरात में माताओं और छोटे बच्चों के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए गए एक विशेष कवरेज अभियान के दौरान 5.14 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को विभिन्न आंगनवाड़ी योजनाओं के तहत शामिल किया गया है।

इस अभियान को नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच लागू किया गया, जिसमें गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और छह साल तक के बच्चे शामिल थे। अधिकांश रजिस्ट्रेशन आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में हुए हैं, जिससे इन समुदायों में कल्याणकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिली।

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महिला एवं बाल विकास विभाग ने यह अभियान उन योग्य लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें आंगनवाड़ी नेटवर्क से जोड़ने के लिए चलाया, जो पहले इन सेवाओं से बाहर थे। अभियान महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील के नेतृत्व में संचालित किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर योग्य बच्चा और मां पोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सके।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभियान के दौरान आदिवासी इलाकों से 2.55 लाख से अधिक लाभार्थियों को जोड़ा गया, जबकि ग्रामीण इलाकों से 2.07 लाख और शहरी इलाकों से लगभग 51,000 लाभार्थियों को शामिल किया गया। इन सभी लाभार्थियों को अब सप्लीमेंट्री पोषण, विकास की निगरानी और बुनियादी स्वास्थ्य सहायता जैसी सेवाओं के तहत कवर किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि ये परिणाम जिला प्रशासनों द्वारा तैयार किए गए विस्तृत माइक्रो-प्लानिंग के जरिए हासिल किए गए। इस योजना ने घर-घर जाकर लाभार्थियों की पहचान करने और दूरदराज और अंदरूनी इलाकों में पहुंच सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

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इस अभियान में खास तौर पर आदिवासी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया, जहां पहले कवरेज कम था। लाभार्थियों के डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने टेको सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया, जो मां और बच्चे के स्वास्थ्य की ट्रैकिंग के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके साथ ही सिस्टमैटिक फील्ड वेरिफिकेशन भी किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीक का इस्तेमाल और जमीनी जांच डुप्लीकेशन को रोकने में मददगार साबित हुआ और यह सुनिश्चित किया गया कि सही लाभार्थियों की पहचान कम समय में हो सके।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और वेरिफिकेशन के जरिए अभियान को सफलतापूर्वक लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें जिला स्तर के अधिकारियों ने उनका सहयोग किया। इन प्रयासों से डेटा की सटीकता में सुधार हुआ और उन लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाई जा सकीं, जो पहले आंगनवाड़ी नेटवर्क में रजिस्टर्ड नहीं थे।

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