संयुक्त राष्ट्र, 5 फरवरी (khabarwala24)। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली संधि ‘न्यू स्टार्ट’ की अवधि खत्म होना, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकेत है।
गुटेरेस ने कहा कि आधी सदी से भी अधिक समय में यह पहली बार है जब दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां रूस और अमेरिका के रणनीतिक परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी और बाध्यकारी सीमा नहीं रह जाएगी। ये दोनों देश मिलकर दुनिया के अधिकतर परमाणु हथियारों के भंडार के मालिक हैं।
‘न्यू स्टार्ट’ संधि रूस और अमेरिका के तैनात परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली प्रणालियों की संख्या पर रोक लगाती थी। यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है।
शीत युद्ध के समय और उसके बाद के वर्षों में, इन दोनों देशों के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण ने दुनिया को बड़े संकट से बचाए रखने में अहम भूमिका निभाई। इससे स्थिरता बनी और कई बार गलत आकलन से होने वाली भारी तबाही को रोका जा सका। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस प्रक्रिया के जरिए दोनों देशों ने अपने भंडार से हजारों परमाणु हथियार कम किए।
गुटेरेस के अनुसार, रणनीतिक हथियार नियंत्रण से पूरी दुनिया की सुरक्षा बेहतर हुई, खासकर अमेरिका और रूस की जनता के लिए।
उन्होंने कहा कि ‘न्यू स्टार्ट’ की समाप्ति ऐसे समय पर हो रही है, जब बीते कई दशकों में पहली बार परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा सबसे ज्यादा है। इससे खराब समय और कोई नहीं हो सकता। गुटेरेस ने कहा, “फिर भी इस अनिश्चितता के क्षण में, हमें उम्मीद ढूंढनी चाहिए। यह रीसेट करने और तेजी से बदलते माहौल के लिए उपयुक्त हथियार नियंत्रण व्यवस्था बनाने का एक अवसर है।”
उन्होंने यह भी स्वागत किया कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने माना है कि परमाणु हथियारों की होड़ दुनिया को अस्थिर करती है और इसे रोकना जरूरी है। अब दुनिया रूस और अमेरिका से यह उम्मीद कर रही है कि वे सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाएं।
गुटेरेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे बिना देरी किए बातचीत की मेज पर लौटें और एक ऐसी नई व्यवस्था पर सहमत हों, जिसमें परमाणु हथियारों पर जांच योग्य सीमाएं हों, जोखिम कम हो और वैश्विक सुरक्षा मजबूत बने।
‘न्यू स्टार्ट’ संधि वर्ष 2011 में लागू हुई थी। यह रूस और अमेरिका के बीच आखिरी बड़ी हथियार नियंत्रण संधि थी, क्योंकि अमेरिका इससे पहले वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस संधि से हट गया था।
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