भारी मुनाफावसूली के चलते सोने-चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट, निवेशकों ने की जमकर बिकवाली

मुंबई, 31 जनवरी (khabarwala24)। इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। डॉलर के मजबूत होने और निवेशकों द्वारा भारी मुनाफावसूली किए जाने के कारण कीमती धातुओं के दाम अचानक नीचे आ गए।शुक्रवार को एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना करीब 9 प्रतिशत गिर गया, जबकि मार्च […]

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मुंबई, 31 जनवरी (khabarwala24)। इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। डॉलर के मजबूत होने और निवेशकों द्वारा भारी मुनाफावसूली किए जाने के कारण कीमती धातुओं के दाम अचानक नीचे आ गए।

शुक्रवार को एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना करीब 9 प्रतिशत गिर गया, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी में 25 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल सोने का भाव 1,49,075 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,91,922 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 10 ग्राम पर घटकर 1,65,795 रुपए रह गया। इससे पहले यह 1,75,340 रुपए पर बंद हुआ था।

कीमती धातुओं में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। यह तब हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वार्श को अगला फेडरल रिजर्व चेयरमैन बनाने का नाम आगे बढ़ाया।

विशेषज्ञों का कहना है कि केविन वार्श महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्त रुख रखते हैं और कम ब्याज दरों के पक्ष में नहीं माने जाते। इसी वजह से सोने और चांदी के निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी।

विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, वास्तविक बॉन्ड यील्ड बढ़ीं और सोने व चांदी में बनी लीवरेज्ड पोजीशन, जिन्हें करेंसी वैल्यू घटने से बचाव के तौर पर लिया गया था, तेजी से खत्म कर दी गई। इसके चलते बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे अरबों डॉलर का मार्केट वैल्यू साफ हो गया और कमजोर निवेशक बाहर हो गए। विश्लेषकों के मुताबिक यह स्थिति तेजी से थकावट की ओर बढ़ने का संकेत है, न कि किसी लंबे समय की मंदी (बेयर मार्केट) की शुरुआत।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के बुनियादी कारक अब भी मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद, साथ ही ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इलेक्ट्रॉनिक्स से बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण चांदी की आपूर्ति में संरचनात्मक कमी बनी हुई है। यही वजह है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी को लेकर तेजी का नजरिया बरकरार है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट एक तरह की जरूरी सुधार प्रक्रिया है। इससे जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी और जोखिम भरे निवेश बाहर हो गए हैं, जिससे आगे चलकर बाजार ज्यादा स्थिर तरीके से ऊपर जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर चांदी की कीमत 3 लाख से 3.10 लाख रुपए के स्तर पर आती है तो वहां से दोबारा खरीदारी शुरू हो सकती है, जिससे चांदी संभावित रूप से 3.40 लाख से 3.50 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर तक जा सकती है।

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