सजा नहीं दवा है उपवास, पाचन तंत्र से लेकर नई कोशिकाएं बनाने में मददगार

नई दिल्ली, 14 जनवरी (khabarwala24)। पेट शरीर का अहम और जरूरी हिस्सा होता है। माना जाता है कि अगर पेट सही है तो आधी से ज्यादा बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती हैं, लेकिन आज की आरामदायक जीवनशैली की वजह से पेट से जुड़े रोग हर उम्र के लोगों की परेशानी बन चुके हैं।भूख न […]

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नई दिल्ली, 14 जनवरी (khabarwala24)। पेट शरीर का अहम और जरूरी हिस्सा होता है। माना जाता है कि अगर पेट सही है तो आधी से ज्यादा बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती हैं, लेकिन आज की आरामदायक जीवनशैली की वजह से पेट से जुड़े रोग हर उम्र के लोगों की परेशानी बन चुके हैं।

भूख न लगना, गैस बनना, एसिडिटी, अपच और पेट में भारीपन की समस्या साधारण बन गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक तरीके से सारी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है?

हम बात कर रहे हैं उपवास की। भले ही उपवास में खुद को भूखा रखना होता है, लेकिन ये सजा नहीं बल्कि औषधि है। पेट से जुड़े रोगों को एक सीमित समय तक दवा के सहारे चलाया जा सकता है, लेकिन एक समय के बाद दवाओं का असर भी कम हो जाता है, इसलिए उपवास सजा नहीं बल्कि शरीर को अंदर से साफ करने का तरीका है, जो कोई दवा भी नहीं कर सकती। उपवास पेट की गहराई से सफाई करता है, पाचन तंत्र को ठीक करने में मदद करता है, और खुद को रिपेयर करने का मौका देने की प्रक्रिया है।

अब सवाल है कि उपवास को कैसे किया जा सकता है। सबसे पहले 15 दिन में एक बार उपवास करने से शुरू कर सकते हैं। इसके लिए एकादशी उपयुक्त रहेगी, क्योंकि ये महीने में दो बार पड़ती है। उपवास की शुरुआत में फलाहार लें और उतने ही फल खाएं जिससे शरीर को ऊर्जा मिल सके। पेट भरने के लिए फलों का सेवन न करें। इसके अलावा, जितना हो सके, शहद वाला पानी, नारियल पानी, और सादे पानी का सेवन करें। पानी शरीर की सारी गंदगी को बाहर निकालने में मदद करेगा।

कुछ लोगों को लगता है कि उपवास रखने से कमजोरी महसूस होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। यह सिर्फ हमारे मन का वहम होता है क्योंकि भोजन से शरीर को 30-40 फीसदी ही ऊर्जा मिलती है, बाकी ऊर्जा पानी, हवा, और आराम करने से मिलती है। इसलिए यह सोचना गलत है कि उपवास करने से कमजोरी महसूस होगी। जापान के वैज्ञानिक उपवास पर शोध भी कर चुके हैं। साल 2018 में हुए शोध के मुताबिक उपवास रखने से शरीर खराब कोशिकाओं को हटाकर नई और स्वस्थ कोशिकाएं बनाता है। इस प्रक्रिया को ऑटोफैगी कहा जाता है।

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