नई दिल्ली, 28 नवंबर (khabarwala24)। ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित लोवी इंस्टीट्यूट ने एशिया पावर इंडेक्स 2025 जारी किया है, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 27 देशों की सैन्य, आर्थिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभावशीलता का विस्तृत आकलन किया गया है। भारत के पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने इस रिपोर्ट को अपने ‘एक्स’ हैंडल पर साझा करते हुए इसे पढ़ने योग्य बताया है।
सैयद अकबरुद्दीन भारतीय विदेश सेवा के 1985 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय राजनयिक हैं। उन्होंने जनवरी 2016 से अप्रैल 2020 तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया था। उन्होंने पहले जनवरी 2012 से अप्रैल 2015 तक भारत के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में कार्य किया था। इससे पहले वह 2006 से 2011 तक आईएईए में भारतीय प्रतिनिधि थे। वर्तमान में वह कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के डीन के रूप में कार्यरत हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एशिया की शक्ति संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। भारत एशिया में एक बड़ी पावर है, जिसने 2025 में 40 पॉइंट की जरूरी लिमिट फिर से हासिल कर ली है। 2025 में भारत का स्कोर 0.9 पॉइंट बढ़ा है।
भारत दो मेजर (इकोनॉमिक कैपेबिलिटी और फ्यूचर रिसोर्स) में तीसरे स्थान पर है। इसने जापान को पीछे छोड़ते हुए अपनी इकोनॉमिक कैपेबिलिटी रैंक एक स्थान बढ़ाकर तीसरे स्थान पर कर ली है। अपने आंतरिक निवेश में बढ़ोतरी के कारण भारत इकोनॉमिक रिलेशनशिप में नौवें स्थान पर पहुंच गया है। एशिया पावर इंडेक्स में यह पहली बार है जब इस मेजर के लिए इसकी रैंकिंग बढ़ी है।
भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका की क्षेत्रीय पकड़ पहले की तुलना में कमजोर हुई है। जापान ने भी अपनी स्थिति सुधारते हुए क्षेत्रीय प्रभाव में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है।
2025 में यूनाइटेड स्टेट्स का स्कोर 1.2 पॉइंट कम हो गया, जिससे यह 2018 में एशिया पावर इंडेक्स की शुरुआत के बाद से अपने सबसे कम स्कोर पर आ गया। हालांकि, यह अब भी सबसे ताकतवर देश बना हुआ है।
यूनाइटेड स्टेट्स ने छह मेजर (इकोनॉमिक कैपेबिलिटी, मिलिट्री कैपेबिलिटी, रेजिलिएंस, फ्यूचर रिसोर्स, डिफेंस नेटवर्क और कल्चरल इन्फ्लुएंस) में अपनी बढ़त बनाए रखी है, हालांकि कल्चरल इन्फ्लुएंस को छोड़कर बाकी सभी में इसके स्कोर में गिरावट आई है।
अमेरिका का सबसे कमजोर मेजर डिप्लोमैटिक इन्फ्लुएंस बना हुआ है, जिसमें यह तीसरे नंबर पर है। इस मेजर में इसमें 2.4 पॉइंट की गिरावट आई, जो राष्ट्रपति ट्रंप की वैश्विक और क्षेत्रीय नीति लीडरशिप के नेगेटिव मूल्यांकन को दिखाता है।
इंडेक्स में देशों को आठ मानदंडों के आधार पर आंका गया, जिसमें सैन्य क्षमता, रक्षा सहयोग, आर्थिक ताकत, कूटनीतिक प्रभाव, सांस्कृतिक प्रभाव, लचीलापन और भविष्य की संसाधन क्षमता शामिल हैं।
एशिया पावर इंडेक्स के टॉप 10 देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका- 80.5 (सुपर पावर), चीन- 73.7 (सुपर पावर), भारत- 40.0 (मेजर पावर), जापान- 38.8 (मिडल पावर), रूस- 32.1 (मिडल पावर), ऑस्ट्रेलिया- 31.8 (मिडल पावर), दक्षिण कोरिया- 31.5 (मिडल पावर), सिंगापुर- 26.8 (मिडल पावर), इंडोनेशिया- 22.5 (मिडल पावर) और मलेशिया- 20.66 (मिडल पावर) शामिल हैं।
इंडेक्स में भारत का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और 2025 में भारत आधिकारिक रूप से ‘मेजर पावर’ की श्रेणी में पहुंच गया है।
इस सूची से पाकिस्तान टॉप टेन से बाहर है, जिसे 16वां स्थान मिला है। पाकिस्तान सांस्कृतिक रूप से काफी कमजोर है, जिसमें वह 22वें स्थान पर है।
जापान ने आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चों पर अपने प्रयास बढ़ाए हैं, जिससे उसकी क्षेत्रीय स्थिति और मजबूत हुई है।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देश भी एशिया की शक्ति समीकरण में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
Source : IANS
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