Khabarwala 24 News Lucknow: UP Newsउत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब निर्धारित समय पर कराना मुश्किल हो गया है। सूत्रों और उच्चपदस्थ अधिकारियों के अनुसार, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे। मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल मई-जुलाई 2026 में समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए जरूरी समय और तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं।
प्रक्रिया निपटाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं दिख रही (UP News)
प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026, क्षेत्र पंचायतों का 19 जुलाई 2026 और जिला पंचायतों का 11 जुलाई 2026 को खत्म हो रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए फाइनल मतदाता सूची 15 अप्रैल 2026 को प्रकाशित होने वाली है। इसके अलावा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, ओबीसी आरक्षण की जटिल प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इतने कम समय में सारी प्रक्रिया निपटाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिख रहा है।
दो विकल्प बचे हैं (UP News)
उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में दो विकल्प बचे हैं या तो मौजूदा प्रधानों, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाया जाए, या फिर चुनाव न हो पाने की स्थिति में प्रशासक नियुक्त कर दिए जाएं। पिछले कई मौकों पर भी जब समय पर चुनाव नहीं हो पाए तो प्रशासनिक हस्तक्षेप का रास्ता अपनाया गया था।
सभी दलों का फोकस 2027 विधानसभा चुनाव पर (UP News)
राजनीतिक रूप से देखें तो सत्ता पक्ष भाजपा और विपक्षी दल सपा, कांग्रेस, बसपा सहित सभी प्रमुख पार्टियां अभी पंचायत चुनावों में उलझना नहीं चाह रही हैं। 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं। पंचायत चुनावों में स्थानीय गुटबाजी और फрак्शनल फाइट बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे बड़े चुनावी अभियान पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी पार्टी की ओर से पंचायत चुनाव कराने की जोरदार मांग नहीं उठ रही है।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला (UP News)
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याची का तर्क है कि मतदाता सूची अप्रैल के मध्य में फाइनल होने के बाद आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने और चुनाव कराने के लिए बहुत कम समय बचेगा। ऐसी स्थिति में चुनाव टलने की आशंका प्रबल है और पूर्व की भांति प्रशासकों की नियुक्ति की नौबत आ सकती है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से एफिडेविट मांगा था, जिसे आयोग ने जमा कर दिया है। अब सबकी निगाहें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
आरक्षण प्रक्रिया में लगेगा समय (UP News)
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया काफी जटिल है। राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की जनसंख्या रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण तय होगा। अभी आयोग का गठन भी नहीं हुआ है। आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी आबादी का सर्वे कर रिपोर्ट सौंपेगा। ब्लॉक स्तर पर ओबीसी जनसंख्या 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी ग्राम प्रधान पदों पर 27 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। वहीं प्रदेश स्तर पर ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य है। इस पूरी प्रक्रिया में कई महीनों का समय लग सकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक नजरिया (UP News)
पंचायत चुनाव स्थानीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर नेतृत्व तैयार करते हैं, जो बाद में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में आधार का काम करते हैं। लेकिन इस बार सभी दल 2027 के बड़े मुकाबले पर फोकस कर रहे हैं। अगर कोर्ट से कोई रोक नहीं लगती तो संभावना है कि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया जाए या प्रशासक लगा दिए जाएं।
यह स्थिति उत्तर प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था पर सवाल भी उठाती है। समय पर चुनाव न हो पाना लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने वाला माना जाता है। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट क्या फैसला सुनाता है और सरकार आगे की रणनीति क्या अपनाती है।
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