Khabarwwala24 UP News: शाहजहांपुर (Shahjahanpur) जिले के जलालाबाद (Jalalabad) नगर का नाम अब बदलकर परशुरामपुरी (Parshurampuri) कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इस संबंध में आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। यह निर्णय न केवल स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है, बल्कि भगवान परशुराम की जन्मस्थली के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को भी रेखांकित करता है। केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने इस फैसले के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया है।
परशुरामपुरी: भगवान परशुराम की जन्मस्थली
जलालाबाद, जिसे अब परशुरामपुरी के नाम से जाना जाएगा, भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र में भगवान परशुराम का एक प्राचीन मंदिर भी मौजूद है, जो स्थानीय और दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है। इस मंदिर और इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व को देखते हुए, लंबे समय से इस नगर का नाम परशुरामपुरी करने की मांग उठ रही थी।
प्रदेश सरकार ने इस मांग को गंभीरता से लिया और नाम परिवर्तन का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था। गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताते हुए बुधवार, 20 अगस्त 2025 को आधिकारिक पत्र जारी किया। इस फैसले ने न केवल शाहजहांपुर के लोगों को, बल्कि पूरे सनातनी समाज को गर्व का एक नया क्षण प्रदान किया है।
जितिन प्रसाद ने जताया आभार
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, “शाहजहांपुर स्थित जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ करने की अनुमति देने पर गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद एवं आभार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आए इस निर्णय ने संपूर्ण सनातनी समाज को गर्व का क्षण प्रदान किया है।”
उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर स्थित जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ करने की अनुमति देने पर माननीय गृह मंत्री श्री @AmitShah जी का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार!
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं मा. मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी का हृदय से आभार, वंदन एवं… pic.twitter.com/d6EanSsCL3
— Jitin Prasada जितिन प्रसाद (@JitinPrasada) August 20, 2025
नाम परिवर्तन की प्रक्रिया और प्रस्ताव
जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने की मांग कई वर्षों से चली आ रही थी। इस मांग को औपचारिक रूप देने के लिए नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और सितंबर 2023 में बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित किए थे। इसके बाद, अप्रैल 2025 में शाहजहांपुर के जिला अधिकारी (डीएम) ने इन प्रस्तावों को संलग्न करते हुए नाम परिवर्तन के लिए अपनी संस्तुति के साथ पत्र प्रदेश सरकार को भेजा।
प्रदेश के प्रमुख सचिव ने इस पत्र को आधार बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर नाम परिवर्तन की मंजूरी देने का अनुरोध किया। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली है और यहाँ उनका ऐतिहासिक मंदिर भी मौजूद है। केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने भी अप्रैल 2025 में लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग को शासन के सामने रखा था।
परशुरामपुरी को 24 अप्रैल 2022 को घोषित किया गया जन्मस्थली
24 अप्रैल 2022 को उत्तर प्रदेश सरकार ने जलालाबाद को आधिकारिक रूप से भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित किया था। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने मंदिर प्रांगण में आयोजित एक सभा में इसकी घोषणा की थी। उन्होंने मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का वादा भी किया था। इस घोषणा के बाद से इस क्षेत्र को और अधिक महत्व मिला, और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि हुई।
30 करोड़ की लागत से हो रहा है विकास (UP News)
परशुरामपुरी को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में और अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कई विकास कार्य शुरू किए हैं। मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत मंदिर प्रांगण के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए 19 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई है। इसके अलावा, अमृत सरोवर योजना के तहत मंदिर के पास स्थित 42 एकड़ के तालाब के पानी को साफ करने, घाट और सीढ़ियों का निर्माण करने, और मंदिर तक एक चौड़ा रास्ता बनाने के लिए 11 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की गई है।
इन योजनाओं के तहत मंदिर प्रांगण को और अधिक सुंदर बनाया जा रहा है, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें। तालाब के किनारे पाथ-वे और अन्य सुविधाओं का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इन कार्यों से न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन के नक्शे पर भी एक प्रमुख स्थान हासिल करेगा।
लोगों की आस्था से जुड़ा है परशुरामपुरी
परशुरामपुरी न केवल शाहजहांपुर के लिए, बल्कि आसपास के जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र रहा है। भगवान परशुराम के इस पवित्र स्थल से लाखों लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। नाम परिवर्तन की मांग भी इसी आस्था और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर की गई थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस निर्णय से इस क्षेत्र का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व और अधिक उजागर होगा।
जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करना एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल भगवान परशुराम की जन्मस्थली को एक नई पहचान देता है, बल्कि इस क्षेत्र को पर्यटन और धार्मिक स्थल के रूप में और अधिक विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी और उत्तर प्रदेश सरकार के विकास कार्यों से परशुरामपुरी जल्द ही एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में उभरेगा।
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