Hapur News Khabarwala 24 News Hapur: संयुक्त जिला चिकित्सालय में जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) पर शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) में तैनात चिकित्सा अधिकारियों का टीबी प्रशिक्षण हुआ। एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया – स्कूल-कॉलेजों में आयोजित कैंप के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण करते समय टीबी के लक्षणों की पहचान करना न भूलें।
डीटीओ डा. सिंह ने जोर देकर कहा कि टीबी का पोषण से सीधा संबंध है। कुपोषण टीबी को बुलावा देने जैसा है। क्योंकि कुपोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और शरीर के जल्दी संक्रमण की चपेट में आने का खतरा रहता है। ऐसे में शारीरिक रूप से कमजोर यानि मध्यम गंभीर कुपोषित (मैम) और गंभीर तीव्र अतिकुपोषित (सैम) बच्चों की टीबी स्क्रीनिंग विशेष रूप से की जानी जरूरी हो जाती है। प्रशिक्षण सत्र में जिला कार्यक्रम समन्वयक दीपक शर्मा, जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी और जिला पीएमडीटी समन्वयक मनोज कुमार गौतम का विशेष सहयोग रहा।
आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डा. मयंक चौधरी ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम भारत सरकार की बड़ी प्राथमिकता है, इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी केवल क्षय रोग विभाग की ही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग के साथ ही हर जागरूक नागरिक की भी है। बच्चे और किशोर देश का भविष्य हैं, और आरबीएसके और आरकेएसके सीधे बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम हैं, इसलिए आरबीएसके और आरकेएसके चिकित्सा अधिकारियों की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है। चिकित्सा अधिकारी स्कूल-कॉलेजों में कैंप के दौरान विशेष रूप से टीबी के लक्षणों की पहचान करें और जरा सी भी गुंजाइश होने पर अपने ब्लॉक के टीबी जांच केंद्र पर स्पुटम जांच कराएं।



