Khabarwala24 Gorakhpur News: जौनपुर के वृद्धाश्रम में गोरखपुर की शोभा देवी की बीमारी से मौत हो गई। बेटे ने घर में शादी होने के कारण शव को ‘अपशगुन’ बताकर 4 दिन डीप फ्रीजर में रखने को कहा। आखिरकार पति ने अकेले ही पत्नी का शव गांव लाकर घाट किनारे मिट्टी में दफना दिया। अब बेटे-रिश्तेदार कह रहे हैं – चार दिन बाद निकालकर जलाएंगे। लेकिन बुजुर्ग पति रो-रोकर कह रहे हैं – “चार दिन में तो कीड़े खा जाएंगे।”
एक साल पहले बेटों ने घर से निकाला था मां-बाप को (Gorakhpur News)
कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के भरोहियां गांव के रहने वाले किराना व्यापारी भुआल गुप्ता (68) और उनकी पत्नी शोभा देवी (65) के तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। सबकी शादी हो चुकी थी। दादा-दादी बन गए थे। लेकिन करीब एक साल पहले बड़े बेटे ने साफ कह दिया – “आप लोग घर पर बोझ बन गए हो, निकल जाओ।”
मां-बाप घर छोड़कर निकले तो राजघाट पर सुसाइड करने पहुंच गए। वहां किसी ने रोका और अयोध्या-मथुरा जाने की सलाह दी। दोनों जगह इंतजाम नहीं हुआ तो जौनपुर के विकास समिति वृद्धाश्रम में जगह मिली। वहां से वे दोनों साथ रहने लगे।
वृद्धाश्रम में ही हो गई मां की मौत (Gorakhpur News)
वृद्धाश्रम के हेड रवि कुमार चौबे ने बताया कि कुछ महीने पहले शोभा देवी को लकवा मार गया था। प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया। 19 नवंबर को फिर तबीयत बिगड़ी। पैर में भयानक सूजन आ गई। अस्पताल में भर्ती कराया तो देर रात मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया – दोनों किडनी फेल हो गई थीं, इंफेक्शन भी बहुत था।
बेटे ने कहा – फ्रीजर में रखो, शादी के बाद देख लेंगे (Gorakhpur News)
मौत की खबर सुनते ही भुआल गुप्ता टूट गए। छोटे बेटे को फोन करवाया। छोटे बेटे ने कहा – “बड़े भैया से बात करके बताता हूं।” थोड़ी देर बाद फोन आया – “भैया बोल रहे हैं कि शादी है, घर में लाश आएगी तो अपशगुन होगा। डेडबॉडी फ्रीजर में रखवा दो, शादी के बाद ले आएंगे।”
यह सुनकर भुआल गुप्ता गुस्से और दुख से भर गए। बोले – “मेरी पत्नी की अंतिम इच्छा थी कि गोरखपुर में अंतिम संस्कार हो, लेकिन अब मैं कहीं नहीं जाऊंगा। यहीं कर दूंगा।”
बेटियां बोलीं – पापा शव गांव ले आओ (Gorakhpur News)
इसी बीच बेटियों का फोन आया। उन्होंने कहा – “पापा, मम्मी का शव गांव ले आओ, हम अंतिम संस्कार करवा देंगे।” भुआल एम्बुलेंस से शव लेकर गांव पहुंचे। लेकिन बड़ा बेटा घर के दरवाजे पर भी शव नहीं आने दे रहा था। आखिरकार रिश्तेदारों और गांव वालों ने कैंपियरगंज घाट के पास ही मिट्टी में शव दफना दिया।
बुजुर्ग पति रोते हुए बोले – कीड़े खा जाएंगे लाश को (Gorakhpur News)
भुआल गुप्ता रो-रोकर कहते हैं – “मैं अपनी पत्नी का हिंदू रीति से दाह संस्कार भी नहीं कर सका। अब बेटे-रिश्तेदार कह रहे हैं कि चार दिन बाद शव निकालकर जला देंगे। चार दिन में तो कीड़े खा जाएंगे। पंडित जी ने भी मना कर दिया कि एक बार दफना दिया तो दोबारा नहीं निकाल सकते। अब आटे का पुतला बनाकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार करेंगे।”
बड़ा बेटा चलाता है आलीशान दुकान और मकान (Gorakhpur News)
गांव वाले बताते हैं कि बड़ा बेटा किराना की बड़ी दुकान और मेडिकल स्टोर चलाता है। कैंपियरगंज में आलीशान मकान भी बनवाया है। लेकिन मां-बाप से कभी बात तक नहीं करता था। छोटे बेटे से कभी-कभी फोन पर बात हो जाती थी।
वृद्धाश्रम संचालक ने कहा – ऐसे बेटे देखे नहीं (Gorakhpur News)
जौनपुर वृद्धाश्रम के हेड रवि कुमार चौबे ने कहा – “इतने सालों में इतना पत्थर दिल बेटा नहीं देखा। मां की लाश को फ्रीजर में रखने को कह रहा है। ये लोग पैसे वाले हैं, लेकिन दिल के बहुत गरीब हैं।”
यह घटना पूरे गोरखपुर और आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग कह रहे हैं कि पैसा कमाना आसान है, मां-बाप का दिल रखना सबसे मुश्किल। आज समाज में ऐसे बेटों की संख्या बढ़ती जा रही है जो मां-बाप को बोझ समझते हैं।
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