Khabarwala24 News Amroha Factory Blast: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट (Firecracker Factory Blast) हुआ। इस हादसे में चार महिला मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना रजबपुर थाना क्षेत्र के अतरासी गांव में हुई। इस विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि करीब एक किलोमीटर तक सुनाई दी। इस हादसे ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया।
Amroha Factory Blast हादसे का विवरण
यह दुखद घटना सुबह के समय हुई, जब फैक्ट्री में कई महिला मजदूर काम कर रही थीं। अचानक हुए धमाके (Factory Blast) ने पूरी फैक्ट्री को हिलाकर रख दिया। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में बारूद (gunpowder) या अन्य ज्वलनशील पदार्थों के कारण यह विस्फोट हुआ। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि फैक्ट्री का एक हिस्सा पूरी तरह से ढह गया। मलबे में दबे मजदूरों को निकालने के लिए ग्रामीणों और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद, अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश भदोरिया, और मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनिल कुमार मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन (rescue operation) शुरू किया। घायल मजदूरों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

फैक्ट्री का संचालन
जानकारी के अनुसार, यह पटाखा फैक्ट्री (Firecracker Factory) हापुड़ के रहने वाले सैफू रहमान द्वारा संचालित की जा रही थी। फैक्ट्री दो भवनों में बनी थी, और विस्फोट इनमें से एक भवन में हुआ। प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या फैक्ट्री के पास सभी जरूरी लाइसेंस और सुरक्षा मानक (safety standards) थे। कई बार ऐसी फैक्ट्रियां अवैध रूप से (illegally) संचालित होती हैं, जिसके कारण इस तरह के हादसे होते हैं।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह हादसा उत्तर प्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों में होने वाली दुर्घटनाओं की एक और कड़ी है। इससे पहले 26 अप्रैल 2025 को सहारनपुर जिले के देवबंद में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट (Factory Blast) हुआ था, जिसमें तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। वह हादसा निहालखेड़ी गांव के पास स्टेट हाईवे-59 पर एक अवैध फैक्ट्री में हुआ था। उस Factory Blast में पूरी इमारत ध्वस्त हो गई थी, और मजदूरों के शव के टुकड़े 200 मीटर तक बिखर गए थे।
इसी तरह, 2 मई 2022 को सहारनपुर के सरसावा थाना क्षेत्र के सौराना गांव में भी एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट (Firecracker Factory Blast) हुआ था। उस हादसे में फैक्ट्री मालिक समेत तीन लोगों की जान चली गई थी। इन घटनाओं से साफ है कि पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी (neglect of safety norms) एक बड़ी समस्या है।
प्रशासन की कार्रवाई
इस हादसे के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस और फायर ब्रिगेड (fire brigade) की टीमें मौके पर मौजूद हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि विस्फोट का कारण क्या था और फैक्ट्री में सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि फैक्ट्री वैध थी या अवैध। जिलाधिकारी ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है, और घायलों के इलाज के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा देखा गया। ग्रामीणों ने मलबे से शव निकालने में प्रशासन की मदद की, लेकिन साथ ही उन्होंने फैक्ट्री मालिक और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ऐसी खतरनाक फैक्ट्रियां आबादी के बीच में चल रही हैं, जो किसी भी समय बड़ी घटना का कारण बन सकती हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसी फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा मानकों की जरूरत
पटाखा फैक्ट्रियों में होने वाले इन हादसों ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं कि क्या इन फैक्ट्रियों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बार बार ऐसी घटनाएं होने के पीछे लापरवाही और नियमों का पालन न करना है। सरकार को चाहिए कि ऐसी फैक्ट्रियों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और उनका पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, मजदूरों को भी सुरक्षा उपकरण (safety equipment) और प्रशिक्षण (training) दिया जाना जरूरी है।


