नई दिल्ली, 16 सितंबर (khabarwala24)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के दौरान कैंपस में हिंसक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े नेता और एनएसयूआई कार्यकर्ता विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं और इससे छात्रों में डर फैल रहा है।
एबीवीपी के अनुसार, कांग्रेस नेता अपने साथ बाहरी लोगों की भीड़ लेकर कैंपस में आ रहे हैं। ये लोग छात्रसंघ या छात्रों की समस्याओं से जुड़े नहीं हैं। इस वजह से कुछ जगह छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। एबीवीपी का कहना है कि सोमवार को कांग्रेस नेता सचिन पायलट नार्थ कैंपस पहुंचे थे, उनके साथ बड़ी संख्या में बाहरी लोग भी मौजूद थे, जिससे छात्रों में डर का माहौल बन गया था।
एबीवीपी दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि कांग्रेस और एनएसयूआई द्वारा विश्वविद्यालय में बाहरी तत्वों को लाकर हिंसा और अराजकता फैलाना बेहद निंदनीय है। डीयू का कैंपस अध्ययन और सकारात्मक छात्र राजनीति का केंद्र है, लेकिन कांग्रेस के नेताओं की दखलअंदाजी ने इसे असुरक्षित बना दिया है। सार्थक का कहना है कि हाल ही में एनएसयूआई के पूर्व संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी से मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ था, जो कैंपस में हिंसक राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आए दिन एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी झगड़े हो रहे हैं, जिससे आम छात्रों में भय और असुरक्षा का वातावरण बनता जा रहा है।
एबीवीपी का कहना है कि मंगलवार को कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण कैंपस में एनएसयूआई समर्थित उम्मीदवार का प्रचार किया। एबीवीपी के मुताबिक वह कांग्रेस नेताओं के इस हस्तक्षेप की कड़ी निंदा करती है और दिल्ली पुलिस से मांग करती है कि बाहरी लोगों की एंट्री पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि विश्वविद्यालय का वातावरण सुरक्षित और छात्र हितों के अनुकूल रह सके।
एबीवीपी का कहना है कि मंगलवार को कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण कैंपस में एनएसयूआई के उम्मीदवार का समर्थन करने पहुंचे। एबीवीपी ने इसे गलत बताया और कहा कि कांग्रेस नेताओं के इस तरह के हस्तक्षेप की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी आग्रह किया कि बाहर के लोगों को कैंपस में आने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि विश्वविद्यालय का माहौल सुरक्षित रहे और छात्रों के हित में रहे।
Source : IANS
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