नई दिल्ली, 17 दिसंबर (khabarwala24)। आज के दौर में प्रदूषण, धूल-धुएं और लगातार बढ़ते तनाव की वजह से त्वचा की प्राकृतिक चमक जल्दी खो जाती है। चेहरा बेजान नजर आने लगता है और मानसिक थकान भी पीछा नहीं छोड़ती। ऐसे में योग पद्धति कमाल की क्रिया कपोल शक्ति विकासक सुझाती है, जिसके नियमित अभ्यास से न केवल चेहरा खिलखिलाता और चमकदार बनता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
यह योगिक व्यायाम चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा देता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा कपोल शक्ति विकासक के बारे में जानकारी देते हुए बताता है कि यह कपोल की शक्ति बढ़ाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत करती है, त्वचा में कसाव लाती है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक प्रदान करती है।
कपोल शक्ति के नियमित अभ्यास से झुर्रियां कम होती हैं, मुंहासे और पायरिया जैसी समस्याओं में राहत मिलती है तथा सांस की बदबू दूर होती है।
योग एक्सपर्ट के अनुसार, इस क्रिया की विधि भी सरल है। इसके लिए सबसे पहले दोनों पैर मिलाकर सीधे खड़े हों। दोनों हाथों की अंगुलियों के अग्रभाग आपस में मिलाते हुए अंगूठों से नासिका के दोनों छिद्र बंद करें। मुंह को कौए की चोंच जैसा बनाकर धीरे-धीरे नाक से सांस अंदर लें। दोनों गालों को पूरी तरह फुलाएं, आंखें बंद करें और ठुड्डी को गले की कूहनी (कंठकूप) में लगाएं (जालंधर बंध)। यथाशक्ति सांस रोकें (कुंभक)। फिर गर्दन सीधी करें और धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। शुरुआत में इस क्रिया को पांच बार दोहराएं। धीरे-धीरे अभ्यास करें।
कपोल शक्ति विकासक अभ्यास के फायदे कई हैं। यह चेहरे की मांसपेशियों को टोन करता है, जिससे गालों में खिंचाव आता है और चेहरा आकर्षक बनता है। जालंधर बंध के कारण थायरॉइड ग्रंथि की कार्यक्षमता सुधरती है। मुंह और नाक की सफाई होती है, जिससे मुंह और मुंहासों की समस्या कम होती है। आंखों की रोशनी बढ़ाने और चेहरे की झुर्रियों को कम करने में भी सहायक है। यह तनाव दूर करती है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार लाती है।
यह क्रिया योग की सूक्ष्म व्यायाम श्रेणी में आती है, जो चेहरे की सुंदरता और स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। नियमित अभ्यास से लाभ मिलता है, लेकिन कुछ सावधानियां जरूरी हैं। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, गर्दन की समस्या या चक्कर (वर्टिगो) वाले व्यक्ति इस क्रिया को न करें।
कुंभक लंबे समय तक न रोकें, विशेषकर शुरुआत में। गर्भवती महिलाएं या कोई गंभीर बीमारी वाले योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अभ्यास करें। खाली पेट सुबह करना बेहतर है। यदि सांस फूलने या असुविधा हो तो तुरंत रोकें।
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