झारखंड हाईकोर्ट ने बाल सुधार गृह के आठ कर्मियों की बर्खास्तगी को ठहराया गलत, सेवा बहाल करने का आदेश

रांची, 27 नवंबर (khabarwala24)। झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो बाल सुधार गृह के बर्खास्त आठ कर्मचारियों की सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश दीपक रौशन की अदालत ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा सेवा समाप्त करने का आदेश ‘‘कानून की नजर में सही नहीं’’ है […]

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

रांची, 27 नवंबर (khabarwala24)। झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो बाल सुधार गृह के बर्खास्त आठ कर्मचारियों की सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश दीपक रौशन की अदालत ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा सेवा समाप्त करने का आदेश ‘‘कानून की नजर में सही नहीं’’ है और इसे रद्द किया जाता है।

अदालत में दायर याचिका के अनुसार, वर्ष 2016 में बोकारो के तत्कालीन उपायुक्त ने बाल सुधार गृह के आठ पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। विधिवत चयन प्रक्रिया के बाद बालमुकुंद प्रजापति, संदीप कुमार, राजेश कुमार, मुकेश कुमार दास, राजेंद्र प्रसाद और राजेश कुमार-2 सहित आठ अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई।

- Advertisement -

नियुक्ति के बाद उनका सर्विस बुक खोला गया और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन भी दिया गया। याचिका में कहा गया कि नियुक्ति के लगभग एक वर्ष बाद सरकार ने कर्मचारियों को एक महीने का नोटिस देकर सेवा समाप्त कर दी। इसके बाद जनवरी 2018 से उन्हें दैनिक वेतन भोगी श्रमिक के रूप में काम कराया जाने लगा।

इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने यह दलील दी कि इन पदों पर नियुक्ति संविदा आधार पर की जानी थी, लेकिन विभागीय त्रुटि के कारण गलती से नियमित कर्मचारियों की तरह सर्विस बुक खोल दी गई। चूक का पता चलते ही नोटिस जारी कर सेवा समाप्त कर दी गई।

वहीं, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नियुक्ति विधि सम्मत प्रक्रिया से हुई थी, सार्वजनिक विज्ञापन के आधार पर चयन किया गया था और पूरा लाभ नियमित कर्मचारियों जैसा दिया गया। सरकारी गलती के लिए कर्मचारियों को दंडित नहीं किया जा सकता। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका खोलना, वेतन देना और नियमित कर्मचारियों की तरह व्यवहार करना यह दर्शाता है कि उनकी सेवाएं स्वीकार की गई थीं। ऐसी स्थिति में विभागीय त्रुटि को आधार बनाकर सेवा समाप्त करना न्यायसंगत नहीं है।

- Advertisement -

Source : IANS

डिस्क्लेमर: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में Khabarwala24.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर Khabarwala24.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Khabarwala24 पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

-Advertisement-

Related News

-Advertisement-

Breaking News