जम्मू, 23 नवंबर (khabarwala24)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को सर्दियों की तैयारियों, कानून-व्यवस्था की स्थिति और दिल्ली ब्लास्ट के बाद के पूरे हालात की समीक्षा करने के लिए एक हाई-लेवल सिक्योरिटी बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में जम्मू-कश्मीर के चीफ सेक्रेटरी अटल डुल्लू, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, अलग-अलग सिक्योरिटी फोर्स और इंटेलिजेंस एजेंसियों के सीनियर अधिकारी शामिल हुए।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कुछ डॉक्टरों से जुड़े व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के पकड़े जाने के बाद लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और इंटरनेशनल बॉर्डर (आईबी) पर हालात, सर्दियों की तैयारियों और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन की समीक्षा की।
पुलिस, इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी फोर्स ने पूरे जम्मू-कश्मीर में सिक्योरिटी सिचुएशन के बारे में जानकारी दी।
डीजीपी नलिन प्रभात ने इस बैठक के दौरान डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हाल ही में हुई ग्राउंड-लेवल रिव्यू मीटिंग्स के आधार पर डिटेल में जानकारी दी। उन्होंने काउंटर-टेरर ऑपरेशन, इंटेलिजेंस सिस्टम को मजबूत करने और कम्युनिटी पुलिसिंग की पहल के बारे में जानकारी दी।
एलजी ने आने वाले महीनों के लिए सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी को और मजबूत करने के लिए इन असेसमेंट और रिकमेंडेशन को ध्यान में रखा।
उपराज्यपाल ने 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आतंकी धमाके के बाद के हालात का रिव्यू किया। इस धमाके में 15 लोग मारे गए थे और 10 घायल हो गए थे, जब एक आतंकी साजिश करने वाले डॉ. उमर नबी ने अपनी विस्फोटक से भरी कार में धमाका कर दिया था।
डॉ. उमर नबी तब गिरफ्तारी से बच निकला था, जब उसके दो आतंकी साथियों, कुलगाम जिले के काजीगुंड इलाके के डॉ. आदिल राथर और पुलवामा जिले के डॉ. मुजम्मिल गनई को जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद इलाके में व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए गिरफ्तार कर लिया था।
इस ब्लास्ट के बाद, पूरे जम्मू-कश्मीर में सिक्योरिटी और कड़ी कर दी गई है, पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई और जरूरी जगहों पर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।
दिल्ली ब्लास्ट केस में अब तक दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें डॉ. आदिल राथर, डॉ. मुजम्मिल गनई, यूपी की डॉ. शाहीन शाहिद और उनके भाई, मौलवी इरफान, आमिर अली, जसीर बिलाल, डॉ. उमर फारूक और उनकी पत्नी शहजादा अख्तर और इलेक्ट्रीशियन तुफैल अहमद शामिल हैं।
एनआईए ने कहा है कि इन सभी ने टेरर अटैक में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें आमिर राशिद अली को तब गिरफ्तार किया गया जब जांच में पता चला कि ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई कार उसके नाम पर रजिस्टर्ड थी, जबकि जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश ने सुसाइड बॉम्बर को टेक्निकल सपोर्ट दिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस केस की जांच एनआईए को सौंप दी है।
Source : IANS
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