गुजरात: करमसद से शुरू हुई राष्ट्रीय एकता पदयात्रा का 11 दिनों के बाद एकता नगर में समापन

गांधीनगर, 6 दिसंबर (khabarwala24)। देश के पहले गृह मंत्री, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उन्हें स्मरणांजलि देने के लिए करमसद से शुरू हुई राष्ट्रीय एकता पदयात्रा 11 दिनों के परिभ्रमण के बाद शनिवार को एकता नगर स्थित सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ […]

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गांधीनगर, 6 दिसंबर (khabarwala24)। देश के पहले गृह मंत्री, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उन्हें स्मरणांजलि देने के लिए करमसद से शुरू हुई राष्ट्रीय एकता पदयात्रा 11 दिनों के परिभ्रमण के बाद शनिवार को एकता नगर स्थित सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परिसर में समाप्त हुई।

एकता पदयात्रा के समापन समारोह में उपस्थित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इस पदयात्रा को भारत की अमर आत्मा का उत्सव करार दिया। उन्होंने गर्व से कहा कि एकता पदयात्रा देश के जन एवं मन को जोड़ने का माध्यम बनी है, जिसमें एकता, कर्तव्य और राष्ट्र निर्माण की भावना का समन्वय देखने को मिला।

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उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि सरदार पटेल हमारे श्रेष्ठ राष्ट्रीय नायक थे, जिन्होंने कुशल नेतृत्व प्रदान कर 560 से अधिक रियासतों को एकीकृत किया। एक और अखंड भारत के निर्माण में सरदार साहब का योगदान पीढ़ियों तक अमर रहेगा।

उन्होंने गौरव से कहा कि देश भर में 1300 से अधिक पदयात्राओं में 14 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी यह सिद्ध करती है कि सरदार पटेल द्वारा प्रज्वलित की गई एकता की ज्योति आज भी जल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरदार साहब से जुड़ी इस पदयात्रा ने पूरे देश में एकता, भाईचारे और एक भारत, श्रेष्ठ भारत, आत्मनिर्भर भारत का संदेश फैलाया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात दुनिया को अहिंसा और सत्य का मार्ग बताने वाले महात्मा गांधी, देश को एकता के सूत्र में बांधने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल और विकास को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मभूमि है। देश के किसी भी कोने में ‘केम छो?’ कहने पर, प्रत्युत्तर में ‘मजा मां!’ सुनने को मिलता है, यह भावना गुजरात की प्रगतिशील विचारधारा और प्रधानमंत्री के लोकप्रिय नेतृत्व का प्रतिबिंब है।

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उपराष्ट्रपति ने युवाओं को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत, सशक्त भारत’ की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि बारडोली सत्याग्रह ने सरदार साहब को देश भर में मजबूत और कद्दावर जननेता के रूप में स्थापित किया। वल्लभभाई पटेल ने अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण कर वृद्धि (लगान वृद्धि) के खिलाफ आंदोलन का आगे बढ़कर नेतृत्व किया। उस समय वे एक सफल वकील थे और आरामदायक जीवन जी सकते थे, लेकिन उन्होंने देश सेवा के लिए अपनी वकालत छोड़ दी।

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने बारडोली के गांव-गांव में घूमकर किसानों को इकट्ठा किया, उनमें आत्मविश्वास जगाया और उन्हें एकता के सूत्र में बांधने का भगीरथ कार्य किया था। ऐसे मुश्किल वक्त में सरदार पटेल ने सफल सत्याग्रह का सफल नेतृत्व किया। किसानों की इस जीत और उनके नेतृत्व के कारण ही वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ का सम्मानित नाम मिला।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के शिल्पी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के समारोह का वर्ष पूरे देश में राष्ट्र गौरव को उजागर करने वाला एक ऐतिहासिक वर्ष बन गया है। यह वर्ष राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ, भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती तथा सरदार साहब की विचारधारा के वैश्विक प्रचार-प्रसार का प्रेरणास्रोत बन रहा है।

उन्होंने देश की एकता के शिल्पी सरदार साहब को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत एक सक्षम राष्ट्र के रूप में खड़ा है। यह सरदार पटेल की राजनीति, हिम्मत और मजबूत इच्छाशक्ति का नतीजा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि डॉ. बाबासाहब अंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान हमारे राष्ट्र के बंधुत्व के संकल्प का प्रतीक है। 26 नवंबर को संविधान अंगीकार दिवस से शुरू हुए इस राष्ट्रीय यूनिटी मार्च का डॉ. बाबासाहब की पुण्य तिथि-परिनिर्वाण दिवस पर पूर्ण होना अपने आप में एक अनोखा और प्रेरणादायी संदेश देता है।

केंद्रीय खेल एवं युवा मामले मंत्री डॉ. मनसुखभाई मांडविया ने कहा कि यह पदयात्रा सरदार साहब के पैतृक गांव करमसद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (एकता नगर) तक 150 किलोमीटर की इस पदयात्रा के अंतिम चरण में उन्होंने स्वयं चार दिनों तक भाग लिया। उन्होंने कहा कि 150 स्थायी पदयात्रियों के साथ देश भर से असंख्य युवा और महिलाएं तथा गुजरात के कोने-कोने से हजारों युवा अपनी क्षमता के अनुसार एक, दो या तीन दिनों के लिए इस यात्रा में शामिल हुए, जिसके कारण यह पदयात्रा सच्चे अर्थ में ‘विचार की यात्रा’ बन गई है।

Source : IANS

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