भोपाल में 7 नवंबर को एसआईआर पर चुनाव आयोग के साथ वाम और धर्मनिरपेक्ष दलों की होगी चर्चा

भोपाल, 6 नवंबर (khabarwala24)। चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराया जा रहा है। चुनाव आयोग की इस पहल पर कई दल सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में वामपंथी दलों तथा धर्मनिरपेक्ष दलों की शुक्रवार को चुनाव आयोग के साथ चर्चा है। एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के साथ होने वाली मुलाकात से […]

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भोपाल, 6 नवंबर (khabarwala24)। चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराया जा रहा है। चुनाव आयोग की इस पहल पर कई दल सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में वामपंथी दलों तथा धर्मनिरपेक्ष दलों की शुक्रवार को चुनाव आयोग के साथ चर्चा है। एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के साथ होने वाली मुलाकात से पहले प्रदेश के वामपंथी धर्मनिरपेक्ष दलों की बैठक गुरुवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यालय भोपाल में हुई l

बैठक में चुनाव आयोग द्वारा मध्य प्रदेश सहित 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा पर चिंता व्यक्त करते हुए इस प्रक्रिया को लेकर आम मतदाताओं के मन में पैदा हुए संदेहों और बिहार के अनसुलझे सवालों का उत्तर दिए बगैर इस प्रक्रिया को शुरू करने के परिणामों पर चर्चा की गई। इन दलों ने शुक्रवार को शाम चार बजे मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात करने का निर्णय लिया है I

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मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात से पहले हुई बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह, सीपीआई के राज्य सचिव शैलेंद्र कुमार शैली, समाजवादी पार्टी के रतन लाल बाथम, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राज्य सचिव अजय श्रीवास्तव के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बादल सरोज, जिला सचिव तेज कुमार तिग्गा, पी एन वर्मा और सीपीआई के ए एच सिद्दीकी ने हिस्सा लियाI

विपक्षी दलों का आरोप है कि बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश सहित 12 राज्यों में एसआईआर की घोषणा समाज के वंचित तबकों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और गरीबों को मताधिकार के अधिकार से वंचित कर, मनुवादी व्यवस्था को लागू करने की साजिश का हिस्सा है, जिसके खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी l

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग बिहार एसआईआर से सामने आए भयावह तथ्यों को छुपाने की कोशिश कर रहा है l बिहार में 18 साल से ऊपर की आबादी 8.22 करोड़ है, जबकि मतदाता सूची में सिर्फ 7.42 करोड़ मतदाता हैं l इससे साफ है कि 80 लाख बिहारी मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर दिया गया, जो कुल मतों का 10 प्रतिशत है l यह इसलिए खतरनाक है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में एनडीए और महागठबंधन के मतों में सिर्फ 12678 मतों का मामूली अंतर था l

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Source : IANS

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