ठंडी हवा की अनदेखी मार: हाइपोथर्मिया से बुज़ुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में

नई दिल्ली, 23 नवंबर (khabarwala24)। सर्दियों की ठिठुरन सिर्फ शरीर को कंपाती नहीं, उम्रदराज लोगों के लिए यह धीमी और खतरनाक जंग भी बन जाती है। जब तापमान अचानक गिरता है, तो शरीर अपने तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए संघर्ष करता है। लेकिन बुज़ुर्गों में यह क्षमता कमजोर हो चुकी होती है। उनकी […]

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नई दिल्ली, 23 नवंबर (khabarwala24)। सर्दियों की ठिठुरन सिर्फ शरीर को कंपाती नहीं, उम्रदराज लोगों के लिए यह धीमी और खतरनाक जंग भी बन जाती है। जब तापमान अचानक गिरता है, तो शरीर अपने तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए संघर्ष करता है। लेकिन बुज़ुर्गों में यह क्षमता कमजोर हो चुकी होती है। उनकी त्वचा पतली होती है, मांसपेशियां कमजोर, ब्लड सर्कुलेशन धीमा और थर्मोरेग्यूलेशन यानी शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम पहले जैसा चुस्त नहीं रहता। ऐसे में जरा सी ठंड भी हाइपोथर्मिया में बदल सकती है।

हाइपोथर्मिया, एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और पूरा सिस्टम लड़खड़ाने लगता है।

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हाइपोथर्मिया की सबसे चालाक बात यह है कि यह धीरे-धीरे हमला करता है। शुरुआत होती है हल्की कंपकंपी, सुस्ती और ध्यान भटकने से। लेकिन बुज़ुर्गों में कंपकंपी की क्षमता भी कम हो जाती है, इसलिए कई बार उन्हें खुद पता ही नहीं चलता कि उनका शरीर खतरनाक अवस्था में पहुंच रहा है। जब दिमाग तक पर्याप्त गर्म खून नहीं पहुंच पाता, तो व्यवहार बदलने लगता है व्यक्ति सामान्य बातों का जवाब नहीं दे पाता, चिड़चिड़ा हो उठता है या गलत बातें करने लगता है। यह भ्रम अक्सर परिवार वाले उम्र के असर और भूलने की बीमारी समझ लेते हैं, जबकि असल में शरीर धीरे-धीरे बंद होने की ओर जा रहा होता है।

‘इमरजेंसी डिपार्टमेंट में बुजुर्गों में कम तापमान के कारण मृत्यु दर (जैने अलकारे एट अल., 2022)’ को लेकर फिनलैंड में एक शोध हुआ। 75 साल और उससे अधिक उम्र वालों को इसमें शामिल किया। शोध-अध्ययन के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि सर्दियों (या ठंडे वातावरण) में बुजुर्गों के लिए हाइपोथर्मिया सिर्फ ठंड लगने की समस्या नहीं, बल्कि मृत्यु का अहम कारण भी बन सकता है।

ठंड बढ़ने पर दिल और ब्लड वेसल्स को भी जोर लगाना पड़ता है। हार्ट रेट बढ़ता है, ब्लड प्रेशर ऊपर जाता है, और अगर व्यक्ति पहले से ही दिल की बीमारी से पीड़ित है, तो यह सीधा हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा देता है। सांसें उथली होने लगती हैं, मांसपेशियों पर नियंत्रण कम होने लगता है, और व्यक्ति अचानक गिर भी सकता है। कई बुजुर्ग घर के अंदर ही फिसलकर चोट खा जाते हैं क्योंकि ठंड से उनकी चाल और भी धीमी और अस्थिर हो जाती है।

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हाइपोथर्मिया से बचाव डॉक्टरों के अनुसार कठिन नहीं है, बस सतर्कता जरूरी है। घर में कमरे का तापमान 18–21 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखना चाहिए। कई बुजुर्ग एक ही मोटा कंबल ओढ़कर पूरी रात ठिठुरते रहते हैं, जबकि परतों में कपड़े पहनना (लेयरिंग) अधिक सुरक्षित होता है। सिर, हाथ और पैर को ढककर रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि शरीर की सबसे ज़्यादा गर्मी इन्हीं हिस्सों से निकलती है। ज्यादा देर तक हार्ड फ्लोर पर न बैठें, गीले कपड़े तुरंत बदलें, और सोने से पहले हल्का गर्म पेय शरीर को भीतर से सुरक्षित रखता है।

Source : IANS

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