बाल दिवस पर ईशा कोप्पिकर ने साझा की पैरेटिंग टिप्स

मुंबई, 14 नवंबर (khabarwala24)। आज के समय में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा आगे बढ़े और जिंदगी में सफलता पाए। इसको लेकर वे उनके लिए सख्त नियम बनाते हैं और दबाव भी बनाए रखते हैं। इस पैरेंटिंग के तरीके को लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर ने बच्चों के लिए समर्पित बाल दिवस पर […]

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मुंबई, 14 नवंबर (khabarwala24)। आज के समय में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा आगे बढ़े और जिंदगी में सफलता पाए। इसको लेकर वे उनके लिए सख्त नियम बनाते हैं और दबाव भी बनाए रखते हैं। इस पैरेंटिंग के तरीके को लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर ने बच्चों के लिए समर्पित बाल दिवस पर अपनी राय साझा की।

उनका मानना है कि आधुनिक समय में बच्चों को प्यार, भावनाओं की समझ और बिना किसी दबाव और बंधन के खुली बातचीत की जरूरत है।

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बाल दिवस के मौके पर khabarwala24 से बातचीत में ईशा कोप्पिकर ने बताया कि वह अपनी बेटी रिआना की परवरिश एक ऐसे माहौल में कर रही हैं, जहां भरोसा, भावनात्मक समझ और खुलापन सबसे आगे हो। उन्होंने कहा, ”मैं उन पुराने तरीकों को नहीं अपनातीं, जिनमें बच्चों पर दबाव डालकर उन्हें तय रास्तों पर चलने को मजबूर किया जाता है। इसके बजाय मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी धीरे-धीरे खुद फैसला लेना सीखे और एक मजबूत, दयालु इंसान बनकर आगे बढ़े।”

ईशा ने कहा, ”मैं रिआना को डर या सख्ती से नहीं संभालती, क्योंकि मेरा मानना है कि जब बच्चे किसी चुनौती से गुजरते हैं तो उन्हें तुरंत समाधान बताने की बजाय खुद सोचने और समझने का मौका दिया जाना चाहिए।”

वह कहती हैं, ”जब रिआना किसी मुश्किल स्थिति में होती है, तो मैं पहले उसे अपनी भावनाएं समझने देती हूं, फिर उसे प्रोत्साहित करती हूं कि वह समस्या का हल खुद तलाशे। इस तरीके से बच्चा आत्मनिर्भर बनता है और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेना सीखता है।”

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अपने रोजाना के रुटीन के बारे में बात करते हुए ईशा ने khabarwala24 को बताया कि वह हर रात सोने से पहले अपनी बेटी के साथ दिनभर की बातें करती हैं। दोनों मिलकर चर्चा करते हैं कि दिन में क्या अच्छा हुआ, क्या गलती हुई, और हर अनुभव ने क्या सिखाया।

ईशा ने कहा, ”मैं अपनी खुद की गलतियां भी रिआना से साझा करती हूं ताकि बच्ची समझ सके कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। असली ताकत इस बात में है कि इंसान अपनी गलतियों को स्वीकार करे, उनसे सीखे और बेहतर बनने की कोशिश करे। यही मूल्य मैं अपनी बेटी के भीतर विकसित करना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि रिआना बड़ी होकर खुद को पूरी तरह आजाद और सुरक्षित महसूस करे। एक बच्चे को यह एहसास होना चाहिए कि वह जैसा है, वैसा ही प्यार और स्वीकार किया जाता है। वह अपने मनचाहे रास्ते पर चले और अपने सपनों को साकार करे, चाहे वह सपने कितने भी अलग क्यों न हों।”

Source : IANS

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