Hapur सांसद अरुण गोविल ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से की मुलाकात, खेल उद्योग के लिए नीतिगत सुधारों की मांग

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Khabarwala 24 News Hapur: मेरठ-हापुड़ (Hapur) लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण गोविल ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर भारत के खेल उत्पाद विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा की। सांसद ने मेरठ के खेल उद्योग को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए नीतिगत सुधारों और तकनीकी उन्नयन की मांग की। मेरठ, जो देश का प्रमुख खेल सामग्री विनिर्माण केंद्र है, में 20,000 से अधिक खेल उद्योग और कुल 1 लाख उद्योग कार्यरत हैं।

कश्मीरी विलो की कमी, पाकिस्तान की बढ़त (Hapur)

सांसद गोविल ने बताया कि भारत क्रिकेट बल्ले जैसे खेल उत्पादों के बाजार में पाकिस्तान से पिछड़ रहा है। पाकिस्तान कश्मीरी विलो के दम पर 90% वैश्विक बल्ला बाजार पर कब्जा जमाए हुए है। इसका प्रमुख कारण जम्मू-कश्मीर विलो अधिनियम, 2000 है, जो अनुच्छेद 370 हटने के बावजूद कश्मीरी विलो के राज्य से बाहर आवागमन पर प्रतिबंध लगाता है। इससे मेरठ जैसे केंद्रों को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान को यह विलो आसानी से उपलब्ध है। गोविल ने इस प्रतिबंध को हटाने और देशभर में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। वर्तमान में इंग्लिश विलो का आयात उत्पादन लागत बढ़ा रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में बाधा है।

तकनीकी और नीतिगत चुनौतियां (Hapur)

भारत कुछ खेल सामग्रियों के निर्माण में तकनीकी रूप से पिछड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। सांसद ने वैश्विक साझेदारियों, तकनीकी हस्तांतरण, और संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। साथ ही, फीफा, फीबा, और आईबीए जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों से मान्यता की उच्च लागत का मुद्दा उठाया। पहले इस पर 50% सब्सिडी मिलती थी, जो अब बंद है, जिससे छोटे और मझोले निर्यातक संकट में हैं।

2036 तक वैश्विक पहचान की मांग (Hapur)

गोविल ने 2036 तक भारत को खेल उद्योग में वैश्विक नेता बनाने के लिए नई तकनीक और सरकारी समर्थन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मंत्री से नियमों में संशोधन, सब्सिडी बहाली, और तकनीकी उन्नयन के लिए त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया।

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