Khabarwala 24 News New Delhi : Krishna and Shukla Paksha हर महीने में 30 दिन होते हैं जिनकी गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है। हिंदू पंचांग के आधार पर भारत के अधिकतर राज्यों में व्रत और त्योहार आदि मनाए जाते हैं। पंचाग के मुताबिक पूर्णिमा के बाद यानी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया महीना शुरू होता है। चंद्रमा की कलाओं के ज्यादा या कम होने के अनुसार ही हर महीने को कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है। इसमें 15 दिनों के एक पक्ष को कृष्ण पक्ष तो बाकी के 15 दिनों का दूसरा शुक्ल पक्ष कहा जाता है। श्राप के प्रभाव के कारण चंद्रमा को बारी-बारी कृष्ण और शुक्ल पक्ष में जाना पड़ता है।
ऐसे होती है दोनों की गणना ( Krishna and Shukla Paksha)
पूर्णिमा से अमावस्या के बीच के 15 दिनों को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। वहीं, दूसरी तरफ अमावस्या से पूर्णिमा तक की अवधि को शुक्ल पक्ष कहा गया है। अमावस्या के अगले दिन से ही चंद्रमा का आकार बढ़ना शुरू हो जाता है जिससे अंधेरे में भी चंद्रमा की काफी तेज रोशनी दिखाई देती है। अमावस्या के बाद चंद्रमा अपने पूरे तेज पर रहता है, इसलिए शुक्ल पक्ष के इन 15 दिनों के दौरान कोई भी नया काम करना बेहद शुभ माना जाता है।
कैसे शुरू हुआ कृष्ण पक्ष ( Krishna and Shukla Paksha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, दक्ष प्रजापति की 27 बेटियां थीं जिनका विवाह उन्होंने चंद्रमा से कर दिया था। वे 27 बेटियां 27 स्त्री के रूप में मानी जाती है लेकिन चंद्रमा केवल रोहिणी से ही प्रेम करते थे। ऐसे में बाकी पुत्रियों ने अपने पिता से इस बात की शिकायत कर दी। दक्ष के समझाने के बाद भी चंद्रमा ने रोहिणी को ही अपनी पत्नी माना और बाकी पत्नियों को अनदेखा करते रहे। तब क्रोध में आकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय रोग का श्राप दिया। श्राप के कारण ही चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे कम हो गया और ऐसे में कृष्ण पक्ष की शुरुआत हुई।
कैसे शुरू हुआ शुक्ल पक्ष ( Krishna and Shukla Paksha)
क्षय रोग का श्राप मिलने के कारण चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे घटता गया जिसके कारण चंद्रमा का अंतिम समय निकट आ गया। ऐसे में चंद्रमा ब्रह्मा के पास गए और उनसे सहायता मांगी तब ब्रह्मा और इंद्रदेव को शिव जी की उपासना करने की सलाह दी। चंद्रमा की आराधना से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने चंद्रमा को अपनी जटाओं में स्थान दे दिया। शिव जी की उपासना से ही चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्ति मिली जिसकी वजह से चंद्रमा का तेज वापस पहले जैसा हो गया। इसी से शुक्ल पक्ष की शुरुआत हुई।


