Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News गढ़ रोड स्थित प्रमुख देवनंदनी हॉस्पिटल में सोमवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रथम तल पर लगे एक एयर कंडीशनर (AC) में अचानक हुए धमाके के बाद भीषण आग लग गई। देखते ही देखते पूरे अस्पताल में जहरीला काला धुआं फैल गया, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस ने मोर्चा संभाला और त्वरित कार्रवाई करते हुए 32 मरीजों, 3 नवजात शिशुओं समेत 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की वजह से एक बहुत बड़ा हादसा होने से टल गया।
एसी में तकनीकी खराबी के बाद हुआ जोरदार धमाका (Hapur News)
प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल स्टाफ के अनुसार, घटना तड़के करीब 1:56 बजे की है। अस्पताल के प्रथम तल पर स्थित सेमी-प्राइवेट रूम नंबर-12 में लगे एसी में अचानक तकनीकी खराबी आई और जोरदार धमाका हुआ। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि सो रहे मरीज और तीमारदार दहल उठे।
धमाके के साथ ही कमरे में आग लग गई और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। वेंटिलेशन कम होने के कारण घना काला धुआं अस्पताल की विभिन्न मंजिलों, आईसीयू (ICU) और इमरजेंसी वार्ड तक पहुंच गया। धुएं से मरीजों का दम घुटने लगा और अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई।

एक्शन में आई फायर ब्रिगेड, पिलखुवा से भी बुलाई गईं गाड़ियां (Hapur News)
घटना की सूचना जैसे ही फायर ब्रिगेड को मिली, अग्निशमन विभाग ने बिना समय गंवाए तत्काल कार्रवाई की। रात 1:57 बजे यानी सूचना मिलने के ठीक एक मिनट बाद हापुड़ अग्निशमन केंद्र से तीन फायर टेंडर (दमकल गाड़ियां) मौके के लिए रवाना कर दिए गए। मामले की संवेदनशीलता और अस्पताल में फंसे लोगों की जान को खतरा देखते हुए पिलखुवा अग्निशमन केंद्र से भी दो अतिरिक्त दमकल वाहनों को बुलाया गया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) और एफएसएसओ (FSSO) खुद मौके पर पहुंचे और पांच फायर टेंडरों के साथ राहत एवं बचाव कार्य की कमान संभाली।
जान जोखिम में डाल बीए (BA) सेट पहनकर धुएं में उतरे दमकलकर्मी (Hapur News)
जब दमकल टीम मौके पर पहुंची, तब तक अस्पताल की पहली मंजिल पूरी तरह से घने और जहरीले धुएं से पट चुकी थी। दृश्यता शून्य के बराबर थी और बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर जाना जानलेवा साबित हो सकता था।
दमकलकर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बीए (Breathing Apparatus) सेट पहने और जान जोखिम में डालकर धुआं उगलती इमारत के अंदर प्रवेश किया। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन को दो हिस्सों में बांटा गया—एक टीम ने आग बुझाने पर ध्यान केंद्रित किया, तो दूसरी टीम ने अंदर फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया।

स्ट्रेचर और गोद में उठाकर बचाई गई मरीजों की जान (Hapur News)
हादसे के समय अस्पताल के आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड में कई गंभीर मरीज भर्ती थे, जो खुद से चल भी नहीं सकते थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय पुलिस ने दमकल विभाग के साथ मिलकर बचाव कार्य तेज किया।
- इमरजेंसी और आईसीयू खाली कराए गए: सबसे पहले बेहद संवेदनशील आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड से मरीजों को निकाला गया।
- गोद में उठाकर निकाले गए मरीज: चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों और बुजुर्गों को दमकलकर्मियों और स्टाफ ने अपनी गोद में उठाकर और स्ट्रेचर की मदद से बाहर निकाला।
- सुरक्षित शिफ्टिंग: सभी मरीजों को तुरंत अस्पताल के दूसरे सुरक्षित ब्लॉक और पास के अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया।

Hapur news–
32 मरीज, 3 नवजात शिशु और 20 अन्य लोग सुरक्षित (Hapur News)
इस साहसिक रेस्क्यू अभियान के दौरान अस्पताल में भर्ती कुल 32 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें तीन नवजात शिशु (Newborns) भी शामिल थे। इसके अलावा अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर फंसे 20 अन्य कर्मचारियों और तीमारदारों को असेंबली प्वाइंट तक सुरक्षित पहुंचाया गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसी भी प्रकार की जनहानि (Loss of life) नहीं हुई।
धुआं निकालने के लिए ‘स्मोक एग्जॉस्टर’ का इस्तेमाल (Hapur News)
दमकल विभाग की सजगता के कारण आग प्रथम तल तक ही सीमित रही और ऊपरी व निचली मंजिलों तक नहीं फैल सकी। हालांकि, पूरी इमारत में भरे जहरीले धुएं को बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए फायर ब्रिगेड ने स्मोक एग्जॉस्टर (Smoke Exhauster) मशीन का उपयोग किया, जिससे धुएं को बाहर खींचकर परिसर को साफ किया गया। कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद आग और धुएं पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया।

पुलिस अधीक्षक का आधिकारिक बयान (Hapur News)
हादसे की जानकारी मिलते ही हापुड़ के पुलिस अधीक्षक (SP) कुंवर ज्ञानंजय सिंह भी बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया “देवनंदनी हॉस्पिटल में आग लगने की सूचना पर पुलिस और फायर सर्विस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंची थीं। संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 32 मरीजों, 3 नवजात बच्चों और अस्पताल स्टाफ समेत सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है। आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है। प्राथमिक जांच में एसी में तकनीकी खराबी और शॉर्ट सर्किट को वजह माना जा रहा है, हालांकि आग लगने के सटीक कारणों की विस्तृत जांच कराई जा रही है।”
त्वरित कार्रवाई की हो रही तारीफ (Hapur News)
हापुड़ दमकल विभाग और पुलिस की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई की स्थानीय निवासियों, अस्पताल प्रबंधन और मरीजों के परिजनों ने जमकर सराहना की है। अधिकारियों का मानना है कि यदि दमकल की गाड़ियां 1 मिनट के भीतर रवाना न होतीं और दमकलकर्मी साहसिक कदम न उठाते, तो धुएं के कारण एक बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल अस्पताल में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
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