Khabarwala 24 News Hapur: Hapur News स्वाधीनता संग्राम शहीद स्मारक समिति हापुड़ के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक शहीद मेला एवं प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन सदर विधायक विजयपाल आढ़ती ने किया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शहीदों की स्मृति में लगने वाले इस मेले का शुभारंभ अमर शहीद तात्या टोपे की प्रतिमा पर माल्यार्पण और फीता काटकर किया गया।
शहीदों मेला देशभक्ति की जीवंत परंपरा (Hapur News)
विधायक विजयपाल आढ़ती ने उद्घाटन के बाद कहा कि हापुड़ का शहीद मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि देशभक्ति की जीवंत परंपरा है। यह मेला स्वाधीनता संग्राम में हापुड़ व आसपास के क्षेत्र से जुड़े शहीदों की कुर्बानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अमर शहीद तात्या टोपे जैसे वीरों के आदर्शों को अपनाकर ही हम एक मजबूत और विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं।
अध्यक्ष ने बताई मेले की विशेषताएं (Hapur News)
समिति के अध्यक्ष ललित कुमार छावनी वाले ने बताया कि शहीद मेला पिछले कई दशकों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करना, युवाओं में स्वाधीनता संग्राम की जानकारी बढ़ाना और स्थानीय कलाकारों व व्यापारियों को मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेले में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, ऐतिहासिक प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी, कृषि एवं उद्योग संबंधी स्टॉल तथा बच्चों के लिए विशेष आकर्षण रखवाए जाएंगे। मेले में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों, दस्तावेजों और वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगवाने का प्रयास रहेगा।

युवा शहीदों की जीवनी पढ़ें (Hapur News)
एडवोकेट मुकुल कुमार त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में जब युवा पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं, ऐसे में शहीद मेला जैसे आयोजन उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शहीदों की जीवनी पढ़ें और उनके आदर्शों पर चलें। कोषाध्यक्ष आशुतोष आजाद ने कहा कि यह मेला न केवल स्मृति का प्रतीक है बल्कि सामाजिक सद्भाव और एकता का भी संदेश देता है।
दशकों से लगता है शहीद मेला (Hapur News)
बता दें कि रामलीला मैदान के बाहर लगे पीपल के पेड़ पर वर्ष 1857 में चार आजादी के दीवानों को फांसी दी गई थी।पीपल का पेड़ वर्तमान में भी शहीदों की शहादत का साक्षी है। यह पेड़ वर्ष 1975 तक उपेक्षित रहा। 10 मई 1975 को पत्रकार स्वर्गीय कैलाश आजाद ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर इस पेड़ के नीचे शहीद दिवस मनाया और शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वर्ष 1976 में देश में जब आपातकाल लागू था तब से यहां दस मई से शहीद मेला एवं प्रदर्शनी का आयोजन शुरू हुआ। मेले को प्रदेश के गजट में भी शामिल कर दिया गया। तब से अब तक प्रत्येक वर्ष दस मई को जनपद में सरकारी अवकाश घोषित किया जाता है।
यह रहे मौजूद (Hapur News)
उद्घाटन समारोह में स्वाधीनता संग्राम शहीद स्मारक समिति के पदाधिकारियों के साथ विधायक विजयपाल आढ़ती ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। समिति के अध्यक्ष ललित कुमार छावनी वाले, महामंत्री एडवोकेट मुकुल कुमार त्यागी, कोषाध्यक्ष आशुतोष आजाद, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष एवं मेला मीडिया प्रभारी ज्ञानेन्द्र त्यागी, मेला संरक्षक धर्मेन्द्र शर्मा, फसीह चौधरी, मेला संयोजक सोनू बंसल, सहसंयोजक मनीष कंसल, गुलशन त्यागी, राजीव गर्ग, संजय गर्ग, मंत्री वीरेन्द्र गर्ग, प्रचार मंत्री अतुल अग्रवाल, विशाल गुप्ता, प्रभात अग्रवाल, सतबीर प्रधान, श्याम वर्मा सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक, स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन और युवा इस अवसर पर मौजूद रहे।
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