होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर आईएमओ की बैठक, ईरान को द‍िया कड़ा संदेश

नई दिल्ली, 19 मार्च (khabarwala24)। अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की परिषद के 36वें असाधारण सत्र में एक अहम निर्णय ल‍िया गया। इसमें ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों और नौवहन में बाधा डालने की धमकियों की कड़ी निंदा की गई।इस कदम का संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत 115 […]

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नई दिल्ली, 19 मार्च (khabarwala24)। अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की परिषद के 36वें असाधारण सत्र में एक अहम निर्णय ल‍िया गया। इसमें ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों और नौवहन में बाधा डालने की धमकियों की कड़ी निंदा की गई।

इस कदम का संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत 115 से अधिक देशों ने समर्थन किया, जिससे वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता सामने आई है।

इस निर्णय में जहाजों के खिलाफ ईरान की धमकियों और हमलों की कड़ी निंदा की गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के उसके कथित कदम को आईएमओ के उद्देश्यों के विपरीत और जीवन के लिए एक गंभीर खतरा तथा समुद्री पर्यावरण के लिए एक बड़ा जोखिम माना गया है।

परिषद ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान के हमलों की भी कड़े शब्दों में निंदा की और इन हमलों को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया।

यह घोषणा यूएई की ओर से प्रस्तुत की गई थी और 115 से अधिक आईएमओ सदस्य देशों की ओर से सह-प्रायोजित थी। यह आईएमओ के इतिहास में सह-प्रायोजकों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। यह ईरान के कार्यों के प्रति वैश्विक प्रभाव और निंदा को दर्शाता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।

इस निर्णय के माध्यम से आईएमओ परिषद ने मांग की क‍ि ईरान तत्काल उन सभी कार्यों या धमकियों से बाज आए, जिनका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करना, उसमें बाधा डालना या किसी भी तरह से हस्तक्षेप करना है। इसके अलावा, यह जलडमरूमध्य के भीतर या उसके आसपास मौजूद व्यापारिक या वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ हो।

यह निर्णय इस बात की भी पुनः पुष्टि करता है कि व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों की ओर से अपने नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रताओं के प्रयोग का सम्मान किया जाना चाहिए।

आईएमओ परिषद ने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को बनाए रखने के सर्वोपरि महत्व पर जोर दिया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का भी स्मरण कराया। इस प्रस्ताव में यह पुष्टि की गई थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से होने वाले वैध पारगमन या नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालने का कोई भी प्रयास अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाएगा।

यह घोषणा आईएमओ की विभिन्न समितियों से आग्रह करती है कि वे इस स्थिति के प्रभावों पर विचार करें।

यूएई ने परिषद की ओर से जापान के एक प्रस्ताव को अपनाए जाने का भी स्वागत क‍िया। यह प्रस्ताव एक ‘समुद्री सुरक्षा गलियारे’ के लिए एक रूपरेखा स्थापित करने को प्रोत्साहित करता है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से नाविकों की सुरक्षित निकासी को सुगम बनाना है।

आईएमओ में यूएई के स्थायी प्रतिनिधि, मोहम्मद खमीस सईद अलकाबी ने परिषद की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा, “परिषद और पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने आज साफ शब्दों में यह मांग की है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का सम्मान करे और व्यापारिक तथा वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से आजादी और सुरक्षा के साथ गुजरने दे। यह जलडमरूमध्य ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है।”

यूएई इस बात पर जोर देता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य न केवल एक महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है, जिससे दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए भी एक महत्वपूर्ण धमनी है, जिसमें उर्वरक, खनिज, पेट्रोकेमिकल्स और आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इसमें किसी भी तरह की रुकावट के वैश्विक बाजारों, आर्थिक स्थिरता और दुनिया भर में जीवन-यापन की लागत पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

यूएई इस बात को दोहराता है कि इस जलडमरूमध्य का उपयोग आर्थिक दबाव बनाने के एक साधन के रूप में करने या अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को धमकाने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था दोनों के ही कमजोर पड़ने का खतरा है।

यूएई, ईरान के गैर-कानूनी कार्यों के प्रभावों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय रूप से शामिल रहने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। समुद्री सुरक्षा और जहाजरानी की आजादी के लिए पैदा हुआ खतरा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर करता है और इसका समाधान किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

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