एससीओ के उप महासचिव: चीन द्वारा प्रस्तावित बहुध्रुवीय सहअस्तित्व ही मानव प्रगति की एकमात्र सही दिशा है

बीजिंग, 10 मार्च (khabarwala24)। 9 मार्च को शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उप महासचिव सोहेल खान, जिन्हें 14वीं चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के चौथे सत्र का दूसरा पूर्णाधिवेशन सुनने के लिए आमंत्रित किया गया था, ने चाइना मीडिया ग्रुप(सीएमजी) को साक्षात्कार दिया। उनका मानना है कि चीन हमेशा से अशांत विश्व में एक स्थिर […]

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बीजिंग, 10 मार्च (khabarwala24)। 9 मार्च को शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उप महासचिव सोहेल खान, जिन्हें 14वीं चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के चौथे सत्र का दूसरा पूर्णाधिवेशन सुनने के लिए आमंत्रित किया गया था, ने चाइना मीडिया ग्रुप(सीएमजी) को साक्षात्कार दिया। उनका मानना है कि चीन हमेशा से अशांत विश्व में एक स्थिर शक्ति रहा है, और चीन द्वारा प्रस्तावित बहुध्रुवीय सहअस्तित्व ही मानव प्रगति की एकमात्र सही दिशा है।

सोहेल खान ने कहा कि चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना काफी महत्वपूर्ण योजना है, जिसका मील के पत्थर का महत्व है। यह चीनी विशेषताओं वाले एक आधुनिक समाजवादी देश के भविष्य के विकास की दिशा को स्पष्ट करती है। यह अगले पांच वर्षों में चीन के विकास के लिए एक नया ‘नुस्खा’ है।

सोहेल खान ने कहा कि चीन के तीव्र विकास ने कई देशों को चौंका दिया है, विशेषकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में। यह चीन की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रणाली पर आधारित है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट विशेषज्ञों को तैयार करने में सक्षम है। पिछले चार-पांच वर्षों में, चीन ने वास्तव में चमत्कार किए हैं। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संबंधित प्रौद्योगिकियों के तीव्र विकास ने उद्योग, कृषि, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में परिवर्तन और प्रगति को गति दी है। समय यह साबित करेगा कि वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में चीन का सशक्त विकास विश्व की अग्रणी शक्तियों में इसकी निरंतर स्थिति सुनिश्चित करेगा।

सोहेल खान ने कहा कि चीन हमेशा से ही अशांत विश्व में एक स्थिर शक्ति रहा है। चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “उभय जीत” वाले सहयोग का निरंतर समर्थन करता है। चीन मानता है कि “शून्य-जमा खेल” प्रतिस्पर्धा से केवल पारस्परिक नुकसान ही होगा। इसका अर्थ यह है कि राष्ट्रों के बीच समानता, आपसी सम्मान, आपसी परामर्श और साझा विकास के माध्यम से ही अंततः समस्त मानवता के लिए सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व प्राप्त किया जा सकता है। जटिल और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में चीन एक प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए सकारात्मक भूमिका निभाना जारी रख सकता है।

चीन द्वारा प्रस्तावित बहुध्रुवीय सहअस्तित्व ही मानव प्रगति की एकमात्र सही दिशा है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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