लखनऊ, 27 जनवरी (khabarwala24)। उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) यूपी को ज्ञापन सौंपा है।
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी ने कासगंज, बहराइच, फर्रुखाबाद और बस्ती जिलों में एसआईआर के दौरान हो रही अनियमितताओं की शिकायत की है। ज्ञापन में सपा ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया में पक्षपात हो रहा है, जिससे सपा समर्थक बूथों के वोटर प्रभावित हो रहे हैं।
ज्ञापन में कासगंज विधानसभा क्षेत्र (बूथ 1 से 200 तक) का विशेष उल्लेख है, जहां अधिकांश बूथ सपा समर्थक बहुल हैं। पार्टी का दावा है कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा सपा समर्थक बूथों पर नोटिस धारकों को मात्र 12 घंटे का समय दिया जा रहा है, जबकि भाजपा समर्थित बूथों पर पर्याप्त समय दिया जा रहा है। बीएलओ पर नियमों की अनदेखी कर नए वोटरों को कम फॉर्म उपलब्ध कराने और घर-घर सत्यापन न करने का आरोप है। सपा ने एसआईआर में लगे कुछ अधिकारियों पर भाजपा एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल हटाने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि वर्तमान विधायक के पुत्र (ब्लॉक प्रमुख) एसआईआर में सपा वोटरों को कटवाने का काम कर रहे हैं।
बहराइच के नानपारा विधानसभा क्षेत्र में नेपाल मूल की महिलाओं (बहुओं) को एसआईआर प्रक्रिया से बाहर करने का आरोप है। उनके पास निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आधार और वोटर आईडी होने के बावजूद मैरिज और माइग्रेशन प्रमाण पत्र मांगकर उन्हें वापस किया जा रहा है। इससे हजारों महिलाएं मतदाता बनने से वंचित हो सकती हैं। सपा ने मांग की है कि समस्या का समाधान कर महिलाओं को मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
फर्रुखाबाद के बूथ 128 (बंगशपुरा और मनिहारी) में पुरानी सूची संयुक्त होने और 2003 के सत्यापन में केवल बंगशपुरा के वोटरों का सत्यापन होने का जिक्र है। मनिहारी के लगभग 300 मतदाताओं को विलोपन सूची में डाल दिया गया, जबकि 2003 की डिटेल नहीं मिलने पर नोटिस जारी किए गए। सपा ने जांच कर विलोपन निरस्त करने की मांग की है।
बस्ती में लगभग 1 लाख से अधिक नो-मैपिंग और लॉजिकल एरर वाले मतदाताओं को नोटिस जारी कर कम समय में सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जिससे मतदाता उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि नोटिसों की बूथवार सूची (ईआरओ नाम, सुनवाई स्थल, तिथि आदि) राजनीतिक दलों और बीएलए को उपलब्ध कराई जाए ताकि वे मतदाताओं की मदद कर सकें।
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