नई दिल्ली, 28 दिसंबर (khabarwala24)। अच्छी नींद सौ रोगों की एक दवा है, लेकिन नींद पूरी न हो तो यही कमी दिल, दिमाग और पूरे शरीर को बीमार बना सकती है। कम नींद न सिर्फ थकान लाती है, बल्कि स्ट्रेस और वजन बढ़ाने का कारण बनती है, पाचन बिगाड़ती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है।
सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने बताया कि नींद की कमी शरीर को सर्वाइवल मोड में डाल देती है, जहां बायोलॉजी खुद कंट्रोल ले लेती है। उन्होंने बताया कि शरीर कैलेंडर या व्यस्तता का इंतजार नहीं करता। कम नींद आने पर वह स्ट्रेस सर्वाइवल मोड में चला जाता है, जहां बायोलॉजी कंट्रोल ले लेती है। कम नींद से दिमाग माइक्रो-स्लीप लेने लगता है। इसमें आंखें खुली रहते हुए 3-15 सेकंड के छोटे झपकी, जो सुरक्षा के लिए होती है। एक रात की कम नींद से कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) 37 प्रतिशत बढ़ जाता है, जिससे पेट की चर्बी, भूख, चिंता और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ती है।
इससे पाचन भी प्रभावित होता है। आंतों में ब्लड फ्लो कम होने से गैस्ट्रिक मोटिलिटी 40 प्रतिशत तक घट जाती है और आंतें लीक होने लगती हैं। कम नींद से फैट बर्न 55 प्रतिशत तक कम हो जाता है। भावनात्मक रूप से भी असर पड़ता है। भावनाएं 60 प्रतिशत तेज हो जाती हैं, क्योंकि लॉजिक वाला दिमागी हिस्सा कमजोर पड़ जाता है। सबसे चिंताजनक है इम्यून सिस्टम, एक रात की अधूरी नींद से नेचुरल किलर सेल्स की ताकत 50 प्रतिशत तक गिर जाती है।
पूजा ने कई वैज्ञानिक स्टडीज का हवाला दिया और कहा कि नींद शरीर का मेंटेनेंस टाइम है। इसे नजरअंदाज करने से बायोलॉजी खुद फैसला ले लेती है। उन्होंने सलाह दी कि आराम खुद चुनें, वरना शरीर जबरन ले लेगा। विशेषज्ञ भी कहते हैं कि 7-8 घंटे की नींद स्वास्थ्य की कुंजी है।
वहीं, आयुर्वेद के अनुसार नींद की कमी मुख्य रूप से वात और पित्त दोष के असंतुलन से होती है। इसे दूर करने के लिए घरेलू उपाय अपनाएं। रात को सोने से पहले गर्म दूध में चुटकीभर जायफल या हल्दी मिलाकर पिएं। यह मन को शांत करता है और गहरी नींद लाता है। अश्वगंधा, ब्राह्मी या जटामांसी का चूर्ण दूध के साथ लें, जो तनाव कम करता है। पैरों के तलवों पर तिल के तेल से मालिश करें।
नियमित दिनचर्या बनाएं, समय पर सोएं-उठें, शाम को हल्का भोजन लें, और स्क्रीन से दूर रहें। शिरोधारा या अभ्यंग जैसे उपचार भी लाभकारी हैं। योगासन और प्राणायाम करें। इनसे दोष संतुलित होते हैं और स्वाभाविक नींद वापस आती है।
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