हैदराबाद, 28 दिसंबर (khabarwala24)। हैदराबाद का लोकप्रिय वार्षिक व्यापार मेला, 85वीं अखिल भारतीय औद्योगिक प्रदर्शनी (नुमाइश), की शुरुआत 1 जनवरी से होगी। नुमाइश का उद्घाटन तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क करेंगे।
राज्य के उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने रविवार को बताया कि 45 दिनों तक चलने वाली इस वार्षिक प्रदर्शनी के लिए विशाल नुमाइश मैदान में 1,050 स्टॉल लगाए जाएंगे।
अखिल भारतीय औद्योगिक प्रदर्शनी समिति (एआईआईएस) ने मेले में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए देश के विभिन्न हिस्सों के व्यापारियों और व्यावसायिक संगठनों को स्टॉल आवंटित किए हैं।
आयोजकों ने प्रवेश शुल्क 40 रुपए प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 50 रुपए कर दिया है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क होगा। उद्योग मंत्री ने कहा कि ‘नुमाइश’ उद्यम, संस्कृति और साझा सार्वजनिक जीवन पर आधारित एक समृद्ध विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह आज भी एक ऐसा मंच है जहां कारीगर, लघु एवं मध्यम उद्यम, परिवार और समुदाय नवाचार, परंपरा और किफायतीपन का अनुभव करने के लिए एक साथ आते हैं।
श्रीधर बाबू ने कहा कि इस वर्ष का ‘नुमाइश’ सुरक्षा, सुलभता और अवसरों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है, खासकर महिला उद्यमियों के लिए, साथ ही उस भावना को भी बरकरार रखता है जिसने इसे पीढ़ियों से एक अनिवार्य वार्षिक परंपरा बना दिया है।
प्रदर्शनी प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से रात 10:30 बजे तक आगंतुकों के लिए खुली रहेगी। शनिवार और रविवार को यह रात 11 बजे तक खुली रहेगी। नुमाइश-ए-मसनुआत-ए-मुल्की, या संक्षेप में नुमाइश, की शुरुआत 1938 में स्थानीय रूप से उत्पादित वस्तुओं को बढ़ावा देने के एक कार्यक्रम के रूप में हुई थी।
हैदराबाद राज्य के सातवें निजाम, मीर उस्मान अली खान ने पहले ‘नुमाइश’ का उद्घाटन किया था।
अच्छी प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर, इसे वार्षिक आयोजन बनाने और इससे होने वाली आय का उपयोग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करने का निर्णय लिया गया।
महज 50 स्टॉलों और 2.50 रुपए की पूंजी से शुरू होकर, यह आज देश की सबसे बड़ी औद्योगिक प्रदर्शनियों में से एक बन गई है।
भारत की स्वतंत्रता के बाद की उथल-पुथल के कारण 1947 और 1948 में ‘नुमाइश’ का आयोजन नहीं हो सका।
हैदराबाद के भारतीय संघ में शामिल होने के बाद, 1949 में इस आयोजन की पुनः शुरुआत हुई। कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में प्रदर्शनी का आयोजन नहीं हो सका। मनोरंजन के झूलों से लेकर अच्छी छूट पर खरीदारी और लजीज व्यंजनों की विविधता तक, यह वार्षिक आयोजन भरपूर मनोरंजन प्रदान करता है।
85वें वर्ष में इसे सभी कार्निवलों की जननी माना जाता है और यह हैदराबाद की समृद्ध संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह न केवल हैदराबाद और सिकंदराबाद के जुड़वां शहरों से, बल्कि तेलंगाना के अन्य हिस्सों और यहां तक कि पड़ोसी राज्यों से भी लोगों को आकर्षित करता है। यह मेला हर साल 1 जनवरी से शुरू होता है और 45 दिनों तक चलता है।
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