बोंडी बीच ट्रेजेडी: अर्पित फूलों और खिलौनों को किया जाएगा संरक्षित, स्थायी स्मारक बनाने पर भी विचार

सिडनी, 21 दिसंबर (khabarwala24)। बोंडी बीच मास शूटिंग को एक हफ्ता हो गया है। जहां दहशतगर्दों ने गोलियां चलाईं वहां अब फूल, सॉफ्ट टॉय, और दिल छू लेने वाले नोट्स रखे हुए हैं। पिछले 7 दिनों से हर शाम लोग यहां पहुंचते रहे और अपने जज्बात जाहिर करते रहे। शनिवार रात को भी कुछ ऐसा […]

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सिडनी, 21 दिसंबर (khabarwala24)। बोंडी बीच मास शूटिंग को एक हफ्ता हो गया है। जहां दहशतगर्दों ने गोलियां चलाईं वहां अब फूल, सॉफ्ट टॉय, और दिल छू लेने वाले नोट्स रखे हुए हैं। पिछले 7 दिनों से हर शाम लोग यहां पहुंचते रहे और अपने जज्बात जाहिर करते रहे। शनिवार रात को भी कुछ ऐसा ही हुआ। रविवार को राष्ट्रीय शोक दिवस को लेकर आयोजित कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर, सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए और इस मुश्किल समय में रोशनी फैलाने के लिए अपने फोन की लाइटें जलाईं। इसके बाद ऐलान किया गया कि जो भी फूल यहां अर्पित किए गए हैं उनको संरक्षित किया जाएगा।

यहां की काउंसिल ने ऐलान किया कि सोमवार 22 दिसंबर से इन फूलों और ट्रिब्यूट्स को हटाया नहीं जाएगा। यहां एक स्थायी स्मारक बनाने पर विचार किया जा रहा है।

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वेवरली के मेयर विल नेमेष ने कहा, “स्थायी स्मारक के बारे में चर्चा बाद में होगी।” लोगों को सूचित करने के लिए बोंडी पवेलियन के चारों ओर साइनबोर्ड लगाए गए हैं कि हटाने की प्रक्रिया 22 दिसंबर से शुरू होगी। लोगों को बताया गया है कि “सिडनी ज्यूइश म्यूजियम और ऑस्ट्रेलियन ज्यूइश हिस्टोरिकल सोसाइटी इन चीजों को इकट्ठा करने और सुरक्षित रखने में मदद करेंगे।”

काउंसिल प्रीमियर के डिपार्टमेंट के साथ मिलकर उसी तरह काम करेगी, जैसा पिछले साल अप्रैल में बोंडी जंक्शन हमलों के बाद किया गया था। प्लान है कि फूलों का संरक्षण होगा, जबकि खिलौनों को दान कर दिया जाएगा। कुछ कार्ड और नोट्स रखे जाएंगे, जबकि बाकी को रीसायकल किया जाएगा। जबकि काउंसिल एक स्थायी स्मारक के विचार पर सोच-विचार कर रही है, वह इस बात पर भी चर्चा कर रही है कि क्या उस फुटब्रिज को हटा दिया जाए जिसका इस्तेमाल हमलावरों ने आतंकी हमला करने के लिए किया था।

स्पष्ट है कि लोगों द्वारा चढ़ाई गई पुष्पांजलियां अब केवल शोक की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामूहिक स्मृति का प्रतीक बन चुकी हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समुद्र तट पर रखी गई फूलों की श्रद्धांजलियों को हटाया जाएगा, लेकिन उन्हें नष्ट नहीं किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां इस त्रासदी और उससे जुड़े मानवीय भावनात्मक क्षणों को समझ सकें।

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साफ किया गया कि यह कदम संवेदनहीनता नहीं, बल्कि स्मृति-संरक्षण की जिम्मेदारी के तहत उठाया जा रहा है। संग्रहालयों और अभिलेखागार विशेषज्ञों की मदद से इन पुष्पांजलियों को संरक्षित किया जाएगा।

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