बीजिंग, 21 दिसंबर (khabarwala24)। डीपीआरके की केंद्रीय समाचार एजेंसी ने डीपीआरके के विदेश मंत्रालय के जापानी अध्ययन संस्थान के निदेशक का एक बयान प्रकाशित किया, जिसमें जापान द्वारा अपनी सुरक्षा नीति में किए गए महत्वपूर्ण समायोजन की निंदा की गई और यह बताया गया कि इससे ‘परमाणु हथियार रखने की उसकी महत्वाकांक्षा उजागर होती है’, जिसे दृढ़ता से रोका जाना चाहिए।
बयान में कहा गया है कि जापान ने अपनी सुरक्षा नीति में भारी बदलाव किया है और एक युद्धप्रिय राज्य में बदलने का प्रयास कर रहा है, युद्ध अपराधी राज्य के लिए निषिद्ध सीमा को पार कर रहा है और यहां तक कि परमाणु हथियार रखने की अपनी महत्वाकांक्षा को भी खुले तौर पर प्रकट कर रहा है।
इस बयान में तर्क दिया गया कि यह महज जबान फिसलने की घटना नहीं थी, बल्कि परमाणु हथियार रखने की जापान की लंबे समय से चली आ रही महत्वाकांक्षा का खुलासा था। यह जापान के संविधान और यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के लिए भी एक सीधी चुनौती है, जो स्पष्ट रूप से एक पराजित राष्ट्र के रूप में जापान के दायित्वों को निर्धारित करता है।
बयान में शांतिप्रिय लोगों से युद्ध अपराधी राष्ट्र जापान की खतरनाक सैन्य कल्पनाओं को दृढ़ता से रोकने का आह्वान किया गया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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