नैरोबी, 18 दिसंबर (khabarwala24)। केन्या में भारत के उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने गुरुवार को कहा कि भारत-केन्या संबंधों की जड़ें गहरे ऐतिहासिक संबंधों में हैं और यह साझेदारी आपसी विश्वास पर आधारित है, जिसमें भविष्य की अपार संभावनाएं निहित हैं।
केन्याई मीडिया को संबोधित करते हुए उच्चायुक्त ने कहा कि यह संबंध केवल सरकारों द्वारा नहीं, बल्कि लोगों द्वारा निर्मित हुए हैं, जिनमें श्रमिक, व्यापारी, सैनिक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत और केन्या के बीच 2,000 वर्षों से अधिक पुराने हिंद महासागर संपर्क और साझा ऐतिहासिक अनुभव इस साझेदारी की मजबूत नींव हैं।
नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, स्वाइका ने मौजूदा सहयोग की मजबूती को रेखांकित किया, जिसमें उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद, रक्षा सहयोग का विस्तार, व्यापार और निवेश में वृद्धि, विकास साझेदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवंत जन-जन संपर्क शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंचों पर अफ्रीका की आवाज के लिए भारत के निरंतर समर्थन पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत-केन्या संबंध विश्वास पर आधारित हैं, इतिहास से आकार लिए हुए हैं और दोनों देशों तथा उनके लोगों के पारस्परिक हितों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए-7) के सातवें सत्र के दौरान केन्या की पर्यावरण मंत्री डॉ. डेबोरा म्लोंगो बरासा से मुलाकात की। इस दौरान संरक्षण, जलवायु अनुकूलन, सतत कृषि और बेहतर पर्यावरणीय शासन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
इस बैठक में भारत के उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
विदेश राज्य मंत्री ने कहा, “यूएनईए-7 के लिए नैरोबी यात्रा के दौरान केन्या की पर्यावरण मंत्री डॉ. डेबोरा म्लोंगो बरासा से मिलकर खुशी हुई। संरक्षण, जलवायु अनुकूलन, सतत कृषि और बेहतर पर्यावरणीय शासन में भारत–केन्या सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। हम दोनों देश एक हरित और अधिक लचीले भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
विदेश राज्य मंत्री ने केन्या के पर्यटन एवं वन्यजीव मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव जॉन ओलोल्टुआ से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने वन्यजीव संरक्षण में भारत–केन्या के बीच बढ़ते सहयोग की समीक्षा की, जिसमें इस वर्ष की शुरुआत में हस्ताक्षरित वन्यजीव प्रबंधन समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी शामिल है।
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