क्या है कॉन्सुलर एक्सेस? भारत ने कहा-पाकिस्तान सजा पूरी कर चुके भारतीयों को छोड़े

नई दिल्ली, 1 जनवरी (khabarwala24)। भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान की कस्टडी से सिविल कैदियों, मछुआरों और उनकी नावों और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों को जल्द रिहा करने और वापस भेजने की मांग की है। विदेश मंत्रालय की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर इसकी जानकारी दी गई। इसके साथ ही भारत ने उन सभी […]

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नई दिल्ली, 1 जनवरी (khabarwala24)। भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान की कस्टडी से सिविल कैदियों, मछुआरों और उनकी नावों और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों को जल्द रिहा करने और वापस भेजने की मांग की है। विदेश मंत्रालय की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर इसकी जानकारी दी गई। इसके साथ ही भारत ने उन सभी कैदियों को कॉन्सुलर एक्सेस देने के लिए कहा है, जिन्हें अब तक यह नहीं मिला है।

इस सिलसिले में विदेश मंत्रालय ने कहा है, “पाकिस्तान से कहा गया है कि वह अपनी कस्टडी में बंद 35 भारतीय सिविल कैदियों और मछुआरों को तुरंत कॉन्सुलर एक्सेस दे।”

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कॉन्सुलर एक्सेस के तहत जब कोई नागरिक विदेश में हिरासत में लिया गया हो, तो उसके देश के राजनयिकों से उसे मिलने, उसका हालचाल जानने, परिवार से संपर्क कराने या अन्य सहायता प्रदान करने की अनुमति मिलती है।

यह अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत कैदी का मौलिक अधिकार होता है। इसमें कैदियों को उसके देश के अधिकारियों से मिलने का अधिकार होता है। कॉन्सुलर एक्सेस पर द्विपक्षीय समझौते 2008 के नियमों के तहत ऐसी लिस्ट हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को एक्सचेंज की जाती हैं।

विदेश मंत्रालय ने प्रेस रिलीज में लिखा, “भारत और पाकिस्तान ने आज नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक चैनलों के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी पर हमले पर रोक के समझौते के तहत आने वाले न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी की लिस्ट एक्सचेंज की है।”

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बता दें, भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हुआ था, जिसे 27 जनवरी 1991 को लागू किया गया। समझौते में यह भी प्रावधान है कि भारत और पाकिस्तान हर कैलेंडर साल की पहली जनवरी को समझौते के तहत आने वाले न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी के बारे में एक-दूसरे को बताएंगे।

दोनों देशों के बीच पहली बार इस तरह की लिस्ट का एक्सचेंज 1 जनवरी 1992 को हुआ था। इस बार लगातार 35वीं बार इस लिस्ट का एक्सचेंज हो रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान से 167 भारतीय मछुआरों और सिविल कैदियों की रिहाई और उन्हें वापस भेजने में तेजी लाने को कहा गया है। ये वो कैदी हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “भारत ने अपनी कस्टडी में बंद 391 सिविल कैदियों और 33 मछुआरों की डिटेल्स वाली लिस्ट शेयर की है, जो पाकिस्तानी हैं या जिन्हें पाकिस्तानी माना जाता है। इसी तरह, पाकिस्तान ने अपनी कस्टडी में बंद 58 सिविल कैदियों और 199 मछुआरों की डिटेल्स वाली लिस्ट शेयर की है, जो भारतीय हैं या जिन्हें भारतीय माना जाता है।”

नई दिल्ली ने कहा कि उसने पाकिस्तान सरकार से सभी भारतीयों और जिन्हें भारतीय माना जाता है, सिविल कैदियों और मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है, जब तक कि उनकी रिहाई और भारत वापस नहीं भेजा जाता।

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, “भारत सरकार की लगातार कोशिशों की वजह से 2014 से अब तक 2,661 भारतीय मछुआरों और 71 भारतीय सिविल कैदियों को पाकिस्तान से वापस लाया गया है। इसमें 500 भारतीय मछुआरे और 13 भारतीय सिविल कैदी शामिल हैं, जिन्हें 2023 से अब तक पाकिस्तान से वापस लाया गया है।”

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