कैनबरा, 23 दिसंबर (khabarwala24)। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बोंडी बीच पर हुए आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक बार फिर से दुख जताया है। इससे पहले सोमवार को उन्होंने यहूदी समुदाय से माफी मांगी थी। मंगलवार को पीएम अल्बनीज ने कहा कि बोंडी बीच पर हुए आतंकी हमले के बाद क्रिसमस का समय दुख और उदासी से भरा होगा।
कैनबरा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अल्बनीज ने कहा कि 14 दिसंबर को सिडनी के बोंडी बीच पर यहूदियों के त्योहार को निशाना बनाकर 15 लोगों की जान लेना यहूदी विरोधी हमला था।
पीएम अल्बनीज ने कहा कि हमले की वजह से क्रिसमस का समय कई लोगों के लिए अलग होगा, लेकिन उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों की हिम्मत, दया की भावना और करुणा की तारीफ की। उन्होंने कहा, “आम तौर पर जो जश्न का समय होता है, वह इस साल दुख और उदासी से रंगा होगा, लेकिन हमले के बाद के हफ्तों में हमने ऑस्ट्रेलियाई चरित्र और ऑस्ट्रेलियाई भावना का सबसे अच्छा रूप भी देखा है।”
बोंडी बीच पर हुए इस आतंकी हमले के बाद से ऑस्ट्रेलियाई सरकार सख्त कानून बनाने की तैयारी में जुट गई है। पीएम अल्बनीज से बातचीत के दौरान गृह मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि केंद्र सरकार ने सख्त बंदूक नियंत्रण कानूनों के लिए ड्राफ्ट बनाना शुरू कर दिया है, जिसे 2026 में संसद में पेश किया जाएगा।
बर्क ने कहा कि केंद्र सरकार के फायरआर्म्स सुधार पैकेज में शुक्रवार को प्रधानमंत्री अल्बनीज द्वारा घोषित एक नेशनल फायरआर्म्स बायबैक स्कीम, फायरआर्म से जुड़े सामानों के लिए नए इंपोर्ट कंट्रोल और 3डी-प्रिंटेड फायरआर्म्स से जुड़े नए अपराध शामिल होंगे।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, बर्क ने कहा कि सरकार एक नेशनल फायरआर्म्स रजिस्टर और एक हेट क्राइम्स डेटाबेस बनाने पर भी तेजी से काम कर रही है। इससे जनता और गन लाइसेंस जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सबसे सटीक जानकारी मिलने में आसानी होगी।
मार्केट रिसर्च कंपनी यूगोव ने सोमवार तक सात दिनों में एक सर्वे किया था। इस सर्वे में पाया गया कि 92 फीसदी ऑस्ट्रेलियाई मानते हैं कि बोंडी बीच आतंकवादी हमले के बाद गन ओनरशिप को गैर-कानूनी बना देना चाहिए या गन ओनरशिप कानूनों को और सख्त कर देना चाहिए।
इस सर्वे के दौरान खुद को गवर्निंग लेबर पार्टी का समर्थक बताने वाले 50 फीसदी लोगों ने कहा कि गन ओनरशिप को गैरकानूनी बना देना चाहिए और 47 फीसदी ने कहा कि कानूनों को और सख्त कर देना चाहिए। इसके अलावा तीन फीसदी लोग ऐसे थे जिनका मानना है कि कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।
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