कांगो में संघर्ष रोकने के लिए अफ्रीकी नेताओं की पहल, क्षेत्रीय नेतृत्व वाले समाधान का किया आह्वान

एंटेबे (युगांडा), 22 दिसंबर (khabarwala24)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में संघर्ष का दौर अभी भी जारी है। डीआरसी में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अफ्रीकी नेताओं ने क्षेत्रीय स्तर पर कोशिशों को आगे बढ़ाने की अपील की। इसके साथ ही अफ्रीकी नेताओं ने कहा कि संकट सुलझाने की कमान क्षेत्रीय देशों […]

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एंटेबे (युगांडा), 22 दिसंबर (khabarwala24)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में संघर्ष का दौर अभी भी जारी है। डीआरसी में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अफ्रीकी नेताओं ने क्षेत्रीय स्तर पर कोशिशों को आगे बढ़ाने की अपील की। इसके साथ ही अफ्रीकी नेताओं ने कहा कि संकट सुलझाने की कमान क्षेत्रीय देशों के हाथ में हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पहलों को भी सहयोगी भूमिका के रूप में लिया जाना चाहिए।

युगांडा के एंटेबे में रविवार को एक दिवसीय रीजनल समिट का आयोजन किया गया। इसमें पूर्वी डीआरसी में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और ग्रेट लेक्स रीजन में हो रहे इसके असर को सुलझाने को लेकर नेताओं और राजदूतों ने चर्चा की।

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युगांडा के विदेश राज्य मंत्री जॉन मुलिम्बा ने कहा कि समिट में शामिल होने वाले इस बात पर सहमत हुए कि ईस्ट अफ्रीकन कम्युनिटी (ईएसी) और दक्षिणी अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी (एसएडीसी) को बढ़ते संघर्ष को सुलझाने के लिए शांति स्थापित करने की कोशिशों का नेतृत्व करना चाहिए।

मुलिम्बा ने कहा, “हमारे पास दोहा और वाशिंगटन शांति प्रक्रिया जैसी पहलें हैं। ऐसे में हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि ईएसी और एसएडीसी को केंद्रीय मंच पर होना चाहिए।”

मुलिम्बा के मुताबिक, समिट में यह भी निर्देश दिया गया कि 10 दिनों के भीतर आधिकारिक बयान में संशोधन किया जाएगा, और प्रस्तावित क्षेत्रीय शांति ढांचे को शामिल करने के लिए दो सप्ताह के भीतर एक फॉलो-अप बैठक आयोजित की जाएगी।

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समिट के दौरान जारी एक बयान में, रवांडा ने कहा कि नई शांति व्यवस्था बनाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही, रवांडा के विदेश मंत्री विंसेंट बिरूता ने तर्क दिया कि दशकों से चल रहे इस झगड़े को सुलझाने के लिए मौजूदा फ्रेमवर्क काफी हैं।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार बिरुता का कहना है कि इस संघर्ष में मुख्य चुनौती ये है कि पहले से जो समझौते हुए हैं उन्हें लागू नहीं किया गया है। उन्होंने वॉशिंगटन समझौते और दोहा शांति पहल को झगड़े के अंदरूनी और क्षेत्रीय, दोनों पहलुओं को सुलझाने के लिए सबसे सही फ्रेमवर्क बताया।

बिरुता ने रवांडा की लिबरेशन ऑफ डेमोक्रेटिक फोर्सेज की मौजूदगी पर भी चिंता जताई। बता दें, लिबरेशन ऑफ डेमोक्रेटिक फोर्सेज 1994 में तुत्सी लोगों के खिलाफ नरसंहार से जुड़ा एक समूह है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को सुलझाने में नाकामी भरोसे को कम करती है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई है।

इस महीने की शुरुआत में, रवांडा और डीआरसी ने वाशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसका मकसद दशकों से चल रही लड़ाई को खत्म करना था। हालांकि, तब से पूर्वी डीआरसी में झड़पें तेज हो गई हैं, और मार्च 23 मूवमेंट (एम23) विद्रोही ग्रुप नई जगहों पर आगे बढ़ रहा है। एम23 ने इस हफ्ते कहा कि उसने उविरा से पीछे हटना शुरू कर दिया है। उवीरा कांगो का एक अहम पूर्वी शहर है, जिस पर एम23 ने कुछ दिन पहले कब्जा किया था।

कांगों के खासकर पूर्वी क्षेत्र में कई दशकों से भीषण संघर्ष चल रहा है। यहां पर प्राकृतिक संसाधनों और क्षेत्रों पर नियंत्रण के लिए 100 से ज्यादा सशस्त्र समूह संघर्ष कर रहे हैं। हाल के दिनों में संघर्ष में और बढ़ोतरी देखी गई है। यहां जिस दुर्लभ खनिज पर नियंत्रण को लेकर ये संघर्ष चल रहा है, उससे हमारे मोबाइल फोन और अन्य डिवाइस चलते हैं।

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