नई दिल्ली, 16 नवंबर (khabarwala24)। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने khabarwala24 से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए बिहार में हाल में हुए विधानसभा चुनाव और उसके नतीजों की जमकर सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के साथ उनका क्या संबंध है।
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे को लेकर उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने कहा, मेरे लिए भारतीय राजनीति पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। हम भारत में होने वाले घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं, जैसा कि राजनयिक समुदाय के लिए सामान्य बात है। हम इस पर रिपोर्ट करते हैं और चुनावों पर नजर रखते हैं, क्योंकि भारत की तरह हम भी एक जीवंत लोकतंत्र हैं। मैं भारत की जनता और सरकार को चुनाव संचालन के तरीके के लिए बधाई देना चाहता हूं, और उन लोगों को भी बधाई देना चाहता हूं जो सफल रहे हैं। मुझे लगता है कि लोकतंत्र इसी तरह काम करता है।
उन्होंने आगे कहा, हमारे पर्यवेक्षक मिशन के हिस्से के रूप में दक्षिण अफ्रीका से एक पर्यवेक्षक दल आया था, क्योंकि हम सीखते हैं। भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और जिस तरह से आप बिहार की आबादी, जो मेरे हिसाब से 10 करोड़ से ज्यादा है, के साथ चुनाव आयोजित करते हैं, वह अपने आप में दक्षिण अफ्रीका की आबादी से भी बड़ा है। लेकिन, जिस व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न हुए, ये सभी ऐसे तत्व हैं जो लोकतंत्र को मजबूत करते हैं और हमारी भी मदद करते हैं। दक्षिण अफ्रीका के एक लोकतांत्रिक समाज से आने के नाते, यह देखना जरूरी है कि हम लोकतंत्र को मजबूत बनाने में कैसे एक साथ काम कर सकते हैं और एक-दूसरे से सीख सकते हैं, क्योंकि आज दुनिया को इसी की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि राष्ट्रों द्वारा ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जो समावेशी नहीं हैं, बहिष्कारवादी हैं, और एकतरफा हैं, और हम भूल जाते हैं कि लोकतंत्र जनता के बारे में है, और जनता और उनकी जरूरतें पहले आनी चाहिए। और यही कारण है कि चुनाव इतने महत्वपूर्ण हैं: लोगों को एक समावेशी, शांतिपूर्ण प्रक्रिया के माध्यम से अपने नेताओं के बारे में निर्णय लेने का अवसर देना, जैसा कि हमने बिहार में देखा।
दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त ने बताया कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर गांव से उनका खास संबंध है। उन्होंने कहा, मेरा पारिवारिक इतिहास ब्रिटिश शासन के समय से जुड़ा हुआ है। मेरे परदादा-परदादी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के एक गांव से आए थे, और उन्हें नेटाल प्रांत में मेरे जन्मस्थान डरबन ले जाया गया, जहां उन्हें एक चीनी बागान में काम करने के लिए नियुक्त किया गया था। मैं चौथी पीढ़ी का भारतीय हूं, मेरी जड़ें गाजीपुर के एक गांव में हैं, और पिछले सप्ताह के अंत में मुझे उस गांव में जाने का सौभाग्य मिला। यह गाजीपुर की मेरी पहली यात्रा थी, जहां मैंने गाजीपुर साहित्य महोत्सव में भाग लिया। मुझे अपने गांव में जाकर उसे खोजने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा, यह हमारे लिए एक तीर्थयात्रा थी, न केवल हमारे लिए, बल्कि दक्षिण अफ्रीका में मेरे पूरे परिवार के लिए भी, और भारतीय समुदाय के कई लोग अपनी जड़ों की इस यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित थे। भारत मेरे डीएनए का उतना ही हिस्सा है जितना अफ्रीका। मैं इस मायने में बहुत भाग्यशाली हूं कि मेरे भीतर, आप दो धाराओं, भारतीय धारा और अफ्रीकी धारा, का सम्मिश्रण देखेंगे।
केके/डीकेपी
Source : IANS
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