Khabarwala 24 News Hapur: Hapur यूपी के जनपद कुशीनगर, उत्तर प्रदेश के धर्मपुर पर्वत निवासी 27 वर्षीय इंजीनियर सनोज कुशवाहा अपनी अनूठी भारत भ्रमण यात्रा के तहत गुरुवार देर रात पिलखुवा पहुंचे। शुक्रवार तड़के हिंदू रक्षा दल के जिला प्रभारी रविंद्र शर्मा और उनकी टीम ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सनोज का लक्ष्य पैदल यात्रा कर भारत की समृद्ध संस्कृति को जानना और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना है।
24000 किलोमीटर की यात्रा पूरी
सनोज ने बताया कि उन्होंने अब तक 27 राज्यों में 24000 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की है। उनकी यात्रा 21 अक्टूबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश से शुरू हुई थी। इस दौरान उन्होंने असम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गोवा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों का भ्रमण किया।
इंजीनियरिंग के बाद शुरू की अनूठी यात्रा
सनोज ने हरियाणा के सोनीपत से 2020 में पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग में अपनी पढ़ाई पूरी की। उसी दौरान उन्होंने भारत के सभी राज्यों की संस्कृति को करीब से जानने का संकल्प लिया। यात्रा शुरू करने के लिए वे केवल एक बैग, कुछ कपड़े और तिरंगा लेकर घर से निकल पड़े। पिछले 2 साल, 7 महीने और 15 दिनों में उन्होंने भारत की विविधता को गहराई से अनुभव किया।
संस्कृति और सहयोग से मिली प्रेरणा
सनोज ने बताया कि हर राज्य की संस्कृति ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। स्थानीय लोगों ने उन्हें रहने-खाने से लेकर हर तरह का सहयोग प्रदान किया, जिससे उनकी यात्रा संभव हो सकी। वे शुक्रवार को गाजियाबाद होते हुए दिल्ली पहुंचेंगे और फिर उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों का भ्रमण करेंगे।
उत्तर प्रदेश के 60 जिलों का भ्रमण
सनोज ने उत्तर प्रदेश के 60 जिलों की यात्रा पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि अपने ही प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को जानना एक अद्भुत अनुभव रहा। वे बाकी जिलों का दौरा कर वहां की संस्कृति को और गहराई से समझना चाहते हैं।
हापुड़ में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत
हापुड़ पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने सनोज का खुले दिल से स्वागत किया। हिंदू रक्षा दल की टीम ने उनकी हौसला-अफजाई की और उन्हें पूरा सहयोग प्रदान किया। सनोज ने हापुड़ के लोगों के प्रेम और सहयोग की सराहना की।
अगला पड़ाव: दिल्ली और उत्तर प्रदेश
सनोज अब दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं, जहां से वे उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों का भ्रमण करेंगे। उनकी यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाने का एक प्रेरणादायक प्रयास भी है।
