Khabarwala 24 News Bulandshahr: Bulandshahr News उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र के मिर्जापुर गांव में शनिवार सुबह एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। 13 वर्षीय किशोर ऋषभ (निवासी राजकुमार पुत्र) घर के पास खाली प्लॉट में बच्चों के साथ खेल रहा था।
खेल-खेल में वह नीम के पेड़ पर चढ़ गया। पैर फिसलने से वह नीचे गिर पड़ा और प्लॉट की नींव में पिलर के लिए छोड़े गए सरिये में से एक उसके दाएं बाजू के नीचे से शरीर में घुस गया। सरिया गर्दन के पास से आर-पार निकल आया। लगभग ढाई फीट लंबा यह लोहा उसके शरीर में फंसा रहा, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ऋषभ एक बार भी नहीं रोया और न ही बेहोश हुआ।
क्या है पूरा मामला (Bulandshahr News)
घटना के समय बच्चे खेल रहे थे। गिरते ही अन्य बच्चे दौड़कर घर पहुंचे और सूचना दी। पिता राजकुमार उस समय मंदिर गए हुए थे, जबकि मां अनिता घर पर काम कर रही थीं। ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। किसी तरह लोहा काटने वाली आरी मंगाई गई और सरिये को जमीन की सतह से काटकर बच्चे को निकाला गया। इस दौरान ब्लीडिंग बहुत कम हुई। स्वजन उसे तुरंत कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े जिला अस्पताल ले गए।
दिल्ली के अस्पताल में किया रैफर (Bulandshahr News)
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया, ड्रिप लगाई, लेकिन ऑपरेशन की हिम्मत नहीं जुटा सके। बच्चे की हालत गंभीर देखकर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। सरकारी एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस से ऋषभ को दिल्ली भेजा गया, जहां सफल ऑपरेशन हुआ और सरिया निकाला गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रदीप राणा ने बताया कि बच्चा गंभीर हालत में आया था, इसलिए उच्च केंद्र रेफर किया गया।
ऋषभ की हिम्मत ने सबको हैरान किया (Bulandshahr News)
पिता राजकुमार बिजली वायरिंग का काम करते हैं और उनके तीन बच्चे हैं। ऋषभ बीच का बेटा है। सरिया शरीर में घुसे होने के बावजूद वह एंबुलेंस में बैठा लोगों को देखता रहा। अस्पताल में मौजूद लोग उसके हौसले की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। एक भी बार चीख या रोने की आवाज नहीं आई। डॉक्टरों का कहना है कि सरिया किसी तरह दिल और फेफड़े को नहीं छुआ, वरना स्थिति बहुत गंभीर हो सकती थी। अगर महत्वपूर्ण अंग क्षतिग्रस्त होते तो बचाना मुश्किल होता।
मां की प्रार्थना और देवी मां की कृपा (Bulandshahr News)
मां अनिता ने बेटे को इस हाल में देखकर भगवान से प्रार्थना की। सरिया कटते ही और अस्पताल पहुंचते ही उन्होंने कहा, “नवरात्र में जगत जननी की बड़ी कृपा हुई, बेटे की जान बच गई।” परिवार और ग्रामीण इसे चमत्कार मान रहे हैं।
यह घटना बच्चों की सुरक्षा, निर्माण साइटों पर सरियों को ढकने और खेल के मैदानों की व्यवस्था पर सवाल उठाती है। ऋषभ का साहस प्रेरणा दे रहा है कि मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। बच्चे अब ठीक होने की राह पर हैं और जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।
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