कोलकाता, 13 दिसंबर (khabarwala24)। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी से जुड़े इवेंट में गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने सीएम से इस्तीफा देने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने बंगाल के गवर्नर डॉ. सीवी आनंद बोस को पत्र लिखते हुए स्थिति को संभालने में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भीड़ को संभालने में नाकाम रहने पर सत्ताधारी पार्टी और उसके सरकारी तंत्र, जैसे स्थानीय पुलिस, को दोषी ठहराया है।
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राज्य सरकार पर शर्म आती है जिसने एक पब्लिक इवेंट को प्राइवेट लूट में बदल दिया है। शनिवार को युवा भारती क्रीड़ांगन में हजारों बंगाली फुटबॉल फैंस को अपमानित किया गया है। उन्होंने लियोनेल मेसी की एक झलक पाने के लिए महंगी टिकटों के लिए भारी कीमत चुकाई, लेकिन इसके बजाय उन्हें मवेशियों की तरह ठूंस दिया गया।”
यह तोड़फोड़ कोई हादसा नहीं था, यह पश्चिम बंगाल खेल विभाग, राज्य सरकार के मंत्रियों, सत्ताधारी पार्टी के विधायकों, नेताओं, उनके परिवार के सदस्यों और दोस्तों, पुलिस और एक मिलीभगत वाली पुलिस फोर्स द्वारा किया गया सुनियोजित गैर-कानूनी काम था। इससे भी बुरा, सीएम की जांच समिति एक दिखावा है, जिसमें जांच के दायरे में आए नौकरशाह शामिल हैं, जिसमें मुख्य सचिव भी शामिल हैं।”
इसलिए, “मैंने माननीय राज्यपाल सीवी आनंद बोस से इस सरकार से आजाद, कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा जज की अगुवाई में एक सच्ची जांच का आग्रह किया है। मुझे उम्मीद है कि महामहिम, जनता का भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी सरकार के इस सार्वजनिक धोखे को नहीं भूलेगा।”
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने पश्चिम बंगाल की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “शर्म करो, ममता बनर्जी। ‘खेला होबे’ सर्कस युवा भारती में टीएमसी की लूट-खसोट का अड्डा बन गया। शनिवार को कोलकाता में कितना शर्मनाक नजारा था। हमारे फुटबॉल के दीवाने बंगाली फैंस, ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम लियोनेल मेसी की एक झलक पाने का सपना देख रहे थे, उन्होंने टिकटों के लिए हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन अपने ही राज्य में उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताव किया गया। जबकि अरूप बिस्वास, सुजीत बोस और उनके 100 से ज्यादा वीआईपी चमचों की टोली जोंक की तरह मेसी पर टूट पड़ी, असली फैंस का क्या हुआ? गैलरी में फंसे हुए, एक बड़ी स्क्रीन पर सिर्फ 5-7 मिनट देख रहे थे। उनके साथ धोखा हुआ है।”
उन्होंने इस इवेंट के दौरान मैनेजमेंट को लेकर कहा, “और यह भी देखिए: अंदर पानी की बोतलें बैन थीं, जिससे मजबूर फैंस को 20 रुपये की बोतल के लिए 200 रुपये देने पड़े। यह टीएमसी का क्लासिक वसूली रैकेट है। इन तथाकथित नेताओं ने एक स्पोर्ट्स आइकन के दौरे को अपने पर्सनल फोटो-ऑप और मुनाफे का जरिया बना लिया। यह सिर्फ कुप्रबंधन नहीं है। यह पश्चिम बंगाल के गौरव पर एक आपराधिक हमला है और हमारे जुनूनी फुटबॉल प्रेमियों के साथ धोखा है। अब बहुत हो गया।”
इस बीच सुवेंदु अधिकारी ने अपनी तीन शर्तें रखते हुए कहा, “विपक्ष के नेता के तौर पर मेरी तीन मांगें है। पहली शर्त- हर गैलरी टिकट धारक को शत प्रतिशत रिफंड मिले। आपने जो भी पैसा लूटा है, उसे वापस करो। दूसरी शर्त- इस सरकारी प्रायोजित अराजकता, लूट और अफरा-तफरी के लिए खेल मंत्री अरूप बिस्वास, अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस और आयोजक शताद्रु दत्ता को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। तीसरी शर्त- ममता बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए, जिन्होंने वैश्विक मंच पर पश्चिम बंगाल का नाम मिट्टी में मिला दिया है। इससे पहले कि आप हमारे राज्य की बची-खुची आत्मा को भी बर्बाद कर दो, अपना पद छोड़ दो। ‘खेला होबे’ प्रोपेगेंडा के लिए मेसी के साथ चुनाव से पहले सेल्फी? अब धोखा खाए दर्शकों ने आपको दिखा दिया है कि असली खेला कैसा होता है, और आपके भ्रष्ट सर्कस को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है।”
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